अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन की शुरुआत शुक्रवार को मावलंकर हाल में हुई। उद्घाटन एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने किया।
अधिवेशन में देश भर से आए करीब 250 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने किसानों से जुड़े मसलों पर खुली चर्चा शुरू की। शनिवार दोपहर बाद समापन सत्र में दो दिन में उठे मसलों का व्यापक मसौदा तैयार किया जाएगा।
संयोजक सिंह ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियां का स्वागत करते हुए उनसे संपूर्ण कर्ज माफी व न्यूनतम समर्थन मूल्य के कानूनी प्रावधानों पर चर्चा की।
उन्होंने किसान प्रतिनिधियों से अपील की कि वे राजनीतिक दलों व सांसदों पर दबाव डालकर उन्हें किसानों की हक में आवाज उठाने को मजबूर करें। उन्होंने कहा कि देश तभी बचेगा, जब अन्नदाता बचेंगे।
उद्घाटन सत्र के बाद एआईकेएससीसी की वर्किंग ग्रुप की बैठक हुई। अधिवेशन में वीएम सिंह के अलावा इसमें योगेंद्र यादव, मेधा पाटकर, अतुल अंजान समेत दूसरे सदस्य मौजूद थे।
इसमें संपूर्ण कर्ज माफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य, भूमि अधिग्रहण कानून-2013, मुक्त व्यापार समझौते, वन अधिकार कानून, लावारिस पशु, कृषि मजदूरों के लिए कानून, कश्मीर में कृषि संकट, पराली और प्रदूषण जैसे मसलों पर चर्चा हुई।
इसके बाद किसान संगठनों के खुले सम्मेलन की शुरुआत हुई। पहले दिन करीब 25 संगठनों के प्रतिनिधियों ने खेती-किसानी से जुड़े मसलों पर अपनी बता रखी। जबकि बाकी संगठनों के प्रतिनिधि शनिवार को इस पर चर्चा करेंगे।
एआईकेएससीसी से जुड़े अवीक साहा ने बताया कि शनिवार दोपहर बाद करीब दो बजे दो दिवसीय चर्चा में उठाए गए मसलों पर एक घोषणा पत्र तैयार होगा। इसे करीब चार बजे जारी किया जाएगा। इसमें किसानों से जुड़े सभी मसले शामिल होंगे।