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Delhi NCR News: एम्स में इस साल शुरू होगा पार्किंसंस रोग के मरीजों के लिए बिना चीरे का इलाज

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-इस तकनीक का नाम मैग्नेटिक रेजोनेंस-गाइडेड फोकस्ड अल्ट्रासाउंड है
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-इस तकनीक की खरीद प्रक्रिया चल रही है और अगस्त तक इसके शुरू होने की संभावना जताई जा रही है


अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पार्किंसन रोग के इलाज के लिए एक नई और आधुनिक तकनीक शुरू होने वाली है। यह तकनीक बिना किसी सर्जरी या चीरे के कंपकंपी (ट्रिमर) या हाथ-पैरों की अकड़न जैसे लक्षणों का इलाज करने में सक्षम मानी जा रही है। तकनीक का नाम मैग्नेटिक रेजोनेंस-गाइडेड फोकस्ड अल्ट्रासाउंड थेरेपी (एमआरजीएफयूएस) है। यह इलाज पूरी तरह बिना चीरे और ऑपरेशन के किया जाता है। मरीज को एमआरआई मशीन के अंदर लिटाया जाता है। सैकड़ों अल्ट्रासाउंड की तरंगें एक जगह पर फोकस करके मस्तिष्क के छोटे-से हिस्से को गर्म करती है। इससे कंपकंपी पर काबू पाया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज जागता रहता है और डॉक्टर तुरंत देख सकते हैं कि इलाज काम कर रहा है या नहीं।

हालांकि इसमें एक कमी भी है, जिसके भविष्य में सुधार होने की संभावना है, जिसमें इस थेरेपी को एक समय में केवल एक ही तरफ किया जा सकता है। इसके बाद छह महीने के अंतराल में ही दूसरी तरफ की प्रक्रिया की जा सकती है। एम्स के न्यूरोलॉजी एंड न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टरों के अनुसार, इस तकनीक की खरीद प्रक्रिया चल रही है और अगस्त तक इसके शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इलावरसी ने बताया कि यह उन मरीजों के लिए खासतौर पर अच्छा विकल्प है जो उम्र ज्यादा होने या दूसरी बीमारियों की वजह से ब्रेन में इलेक्ट्रोड डालने वाले बड़े ऑपरेशन डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) नहीं करा सकते। इसमें न तो कोई घाव होता है, न इन्फेक्शन का खतरा और न ही कोई बैटरी या इम्प्लांट शरीर में डालना पड़ता है। मरीज जल्दी ही घर जा सकता है। वहीं, सहायक प्रोफेसर डॉ. अनिमेष ने बताया कि मौजूदा समय में दवाइयों से उपचार होता है, जब इससे भी मरीज के लक्षण पूरी तरह से नियंत्रित नहीं होते तब डीबीएस एपोमॉर्फिन पंप और एमआरएफयूएस इस्तेमाल किया जाता है।
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फोकस अल्ट्रासाउंड थेरेपी करने वाला एम्स बनेगा देश का पहला सरकारी अस्पताल : अभी यह इलाज भारत में सिर्फ कुछ बड़े निजी अस्पतालों में उपलब्ध है, जहां एक तरफ का इलाज बहुत महंगा पड़ता है। लेकिन, एम्स में इस तकनीक को लगाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इस तकनीक के लगने से एम्स देश का पहला सरकारी अस्पताल बन जाएगा, जहां यह बिना चीरे वाला इलाज उपलब्ध होगा। डॉक्टरों का कहना है कि फोकस अल्ट्रासाउंड थेरेपी पार्किंसंस रोग के चुनिंदा मरीजों के लिए एक सुरक्षित, प्रभावी और आसान विकल्प साबित हो सकता है। उनका मानना है कि आने वाले समय में यह हजारों मरीजों की जिंदगी आसान बना सकता है।
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