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अगले महीने से शुरू होगा एम्स का नया ओपीडी ब्लॉक, मरीजों को मिलेंगी अत्याधुनिक सेवाएं

Thu, 09 Jan 2020 11:00 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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aiims - फोटो : file photo
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आखिरकार दिल्ली एम्स के नए ओपीडी ब्लॉक की सेवा मरीजों को अब मिलने जा रही है। अगले महीने से ब्लॉक शुरू होगा। कई साल से बन रहे इस ब्लॉक में तमाम अत्याधुनिक सेवाएं होंगी। गुरूवार शाम को एम्स प्रबंधन के अधिकारी ने बताया कि फरवरी में इसे शुरू किए जाने का प्रस्ताव मंजूर हो चुका है। अब अगले एक से दो सप्ताह में फाइनल डेट भी पता चल जाएगी।

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इस नए ब्लॉक में एम्स के नए ओपीडी में तीन बेसमेंट, एक ग्राउंड फ्लोर और आठ मंजिल है। सबसे निचले बेसमेंट में पार्किंग है और बाकी के दो बेसमेंट को  जांच यानि टेस्टिंग के लिए रखा गया है। 

नए ओपीडी के 270 कमरों में डॉक्टर मरीजों को देख सकेंगे। नए ओपीडी को तीन विंग में बांटा गया है। प्रोसिजर और इलाज के लिए अलग रुम है। 13 छोटे ऑपरेशन थियेटर है जहां माइनर सर्जरी की जा सकेगी। इसके अलावा 2 डे केयर एरिया होगा। नए ओपीडी में 8 से 10 हजार मरीजों के देखने की व्यवस्था होगी। साथ ही स्टाफ और छात्रो के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था होगी। 1 बेसमेंट में रेडियोलॉजी की व्यवस्था होगी। 
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जहां प्रतिदिन 60 हजार खून पेशाब के अलावा दूसरे जांच की व्यवस्था होगी। ग्राउंड फ्लोर पर 40 काउंटर रजिस्ट्रेशन के लिए काउंटर होंगे। लाईन को सही ढ़ंग से व्यवस्थित करने के लिए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लगा है  ताकि स्क्रीन पर मरीज को अपनी बारी का पता चले।

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सफदरजंग अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन खोपड़ी मॉडल पर करेंगे अभ्यास

सफदरजंग अस्पताल में अगले दो दिन तक खोपड़ी मॉडल पर डॉक्टर अभ्यास कर सकेंगे। शुक्रवार से अस्पताल में दो दिवसीय क्रैनियो मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में वर्तमान रुझान विषय पर कार्यशाला आयोजित हो रही है। अस्पताल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. शलभ कुमार बताते हैं कि जन्म से जुड़ी विकृतियों और चेहरे व खोपड़ी की विकृतियों के बारे में नए डॉक्टरों को पर्याप्त जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभी तक रेजीडेंट डॉक्टर को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है। 

इन जटिल विकृति की अक्सर अनदेखी की जाती है या कुछ उत्कृष्ट संस्थानों का जिक्र किया जाता है, जो उन रोगियों के भार को संभालने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। यह कार्यशाला कार्यात्मक, सौंदर्य और मनोवैज्ञानिक मुद्दों पर आधारित है। सीएमई कार्यशाला नवोदित प्लास्टिक सर्जनों को एक मंच प्रदान करती है, जो इस जटिल समस्या की बारीकियों को समझने के लिए व्यवहारिक व्याख्यान और खोपड़ी मॉडल सर्जरी के गुर सिखाती है।

इस दौरान डॉक्टर बाहरी संकायों के मार्गदर्शन में विभिन्न विकृति और मैक्सिलोफेशियल चोटों के बारे में खोपड़ी के मॉडल पर सर्जरी का अभ्यास करेंगे। इस कार्यक्रम में देश के कई अस्पतालों के डॉक्टर हिस्सा लेंगे। डॉ. शलभ कुमार का कहना है कि बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग बहुत कम केंद्रों में से एक है जो मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में युवा प्लास्टिक सर्जनों को उनकी प्रैक्टिस के दौरान ये प्रशिक्षण देता है। 
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