एम्स वर्कशॉप सेंटर (सीडब्ल्यूएस) के इंजीनियरों ने एक ऐसी मशीन तैयार की है, जिस पर डॉक्टर ऑपरेशन से पहले अपना हाथ साधने की प्रैक्टिस कर सकते हैं। आमतौर पर चिकित्सीय विद्यार्थी या नए सर्जन के लिए हाथ साधने की प्रैक्टिस होना बेहद जरूरी होता है। ताकि मरीज के शरीर पर चीरा लगाते वक्त हाथ डगमगाना नहीं चाहिए।
एम्स के सीडब्ल्यूएस के मुख्य अधिकारी कालू राम कुमार बताते हैं कि सर्जरी विभाग की ओर से डॉक्टरों की प्रैक्टिस के लिए एक मशीन तैयार करने की मांग आई थी। काफी विचार और चर्चा के बाद लेप्रेस्कोपिक 3डी कर्वड सरफेस मशीन तैयार किया गया है। बिजली से चलने वाली इस मशीन के ऊपरी हिस्से पर एक सरफेस दिया है, जहां डॉक्टर चाकू या कैंची का इस्तेमाल कर सकते हैं।
निचले स्तर पर मशीन में कंपन की सुविधा दी गई है। ताकि ऊपरी हिस्से पर किस जगह हाथ चल रहा है उसकी जानकारी मिल सके। देखने और तकनीकी में यह मशीन पूरी तरह से स्वदेशी है। आईटीआई और बीटेक इंजीनियरों ने मिलकर इसे तैयार किया है। 64 वां स्थापना दिवस मना रहे एम्स की प्रदर्शनी में इस मशीन को भी अलग से लगाया गया है।
एम्स प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चिकित्सीय क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष संस्थानों में गिनती के बाद अब दिल्ली एम्स चिकित्सा और तकनीक को लेकर एक साथ कार्य कर रहा है।
शोध के लिए बनाया विशेष चूहा घर
एम्स के शोधार्थियों की मदद के लिए एक विशेष चूहा घर बनाया है। संस्थान के सिविल इंजीनियरों ने हाल ही में शोधार्थियों पर एक सर्वे के बाद यह पता लगाया था कि अक्सर चूहे के पिंजड़े को लेकर काफी दिक्कत आती है।
कई बार शोधार्थी चूहे को सभी ओर से निरीक्षण नहीं कर पाते हैं या पिंजड़े को घुमाना पड़ता है। इतना ही नहीं चूहे को पानी भी पिंजड़े में फैल जाता था। पिंजड़े में एक लंबी रॉड लगी है, जिसे घुमाते हुए चारों दिशा से चूहे का निरीक्षण किया जा सकता है।
शरीर के किसी एक हिस्से पर पड़ रहे वजन की पहचान आसान
एम्स के हड्डी रोग विभाग में इन दिनों एक ऐसी मशीन मरीजों के लिए उपलब्ध है, जिसके जरिये यह पता चल सकता है कि शरीर के किस हिस्से पर ज्यादा वजन पड़ रहा है? विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर पांच में से एक व्यक्ति को गिरने से गंभीर चोटें आती हैं।
कई बार सिर में चोट या हड्डी तक टूट जाती है। जब शरीर के किसी एक हिस्से पर सबसे ज्यादा वजन रहता है तो हिस्से में गिरने के दौरान सबसे ज्यादा चोट लगने की संभावना रहती है। इसीलिए डॉक्टरों ने मरीजों के लिए यह मशीन मंगाई है, जिसके जरिये लोग पहले से ही जागरूक हो सकें।