अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हर दिन सैकड़ों मरीजों का उपचार करने वाले विदेशी रेजिडेंट डॉक्टर बीते कई वर्षों से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। अपने परिवार के साथ इनका जीवनयापन भी मुश्किल में पड़ गया है। इसलिए नेपाल सरकार ने भी पीएमओ से इस मामले में दखल देने की अपील की है।
दिल्ली एम्स में इस समय करीब 70 से ज्यादा विदेशी डॉक्टर हैं जोकि सीनियर और जूनियर रेजिडेंट पद पर हैं। इनमें से ज्यादातर नेपाल के रहने वाले हैं। इन डॉक्टरों का कहना है कि 2009 तक दिल्ली एम्स में विदेशी डॉक्टर को वेतन दिया जाता था, लेकिन पिछले 10 वर्षों से ये लोग निशुल्क ही सेवाएं दे रहे हैं।
जबकि इन्हीं पदों पर भारतीय डॉक्टर को करीब 80 हजार से 1 लाख रुपये तक का मासिक वेतन सरकार दे रही है। एम्स प्रबंधन के अनुसार, जल्द ही राहत दी जाएगी। फिलहाल एम्स की वित्तीय समिति की आगामी बैठक में फैसला लिया जाएगा। हालांकि इसमें कितना वक्त लगेगा? इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
वहीं डॉ. अंसरूल हक का कहना है कि नेपाल सरकार ने भी इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पैरवी की है जिसके बाद मंत्रालय से एम्स को निर्देश भी मिले हैं।