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बाजार में खुलेआम बिक रहा एक खास नशा, तेजी से शिकार हो रहे युवा, एम्स को अध्ययन की मंजूरी

Tue, 12 Nov 2019 01:49 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टर जल्द ही एक नए और खास किस्म के नशे का खुलासा कर सकते हैं। यह एक नशा इन दिनों रेव पार्टियों में ज्यादातर इस्तेमाल हो रहा है। 

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दिल्ली एनसीआर नहीं बल्कि चंडीगढ़, मुंबई, बैंगलूरू, चैन्ने और गोवा इत्यादि जगहों पर भी इसकी आपूर्ति की आशंका जताई जा रही है। अत्याधुनिक दवाओं के भीतर रसायनों में मिश्रित कर इस नशे को युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है ताकि नशे का कारोबार करने वाले खुलेआम कानून को धोखे में रख अपना धंधा कर सकें। 

कुछ ही समय पहले एम्स आए इस नशे के शिकार युवाओं की जांच में डॉक्टरों को जब इसका पता चला तो उन्होंने तत्काल सरकार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद सरकार ने एम्स के डॉक्टरों को नए नशे पर अध्ययन करने की मंजूरी दे दी। समाज कल्याण मंत्रालय की ओर से अध्ययन को आर्थिक मदद के आदेश भी दिए हैं। 
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एम्स गाजियाबाद स्थित नेशनल ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट सेंटर (एनडीडीटीसी) के प्रमुख डॉ. राकेश चड्डा ने बताया कि इन दिनों बाजार में न्यू साइको एक्टिव सब्सटेंस (एनपीएस) नामक दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। रेव पार्टियों में इन दवाओं को युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है। 

कोकीन और गांजे से बनी हैं दवाएं
डॉक्टरों की मानें तो यह दवाएं कोकीन और गांजा से निर्मित होती हैं। इन दवाओं को बनाने वाले मिश्रण से एक ऐसा रसायन बनाते हैं जिसका इस्तेमाल वह खुलेआम कर सकते हैं। अमेरिकी राज्यों में इसका खुलासा करीब चार वर्ष पहले ही हो चुका है। अब इनके निशाने पर भारत है। दुनिया भर में इनका कारोबार सीमित होने के कारण अभी तक इसके बारे में ज्यादा जानकारी किसी देश के पास नहीं है। 

एम्स के पास है किट, यूरीन से करती है पहचान
एम्स के पास एक ऐसी किट है जिसमें यूरिन की जांच के जरिए इस नए किस्म के नशे की पहचान की जा सकती है। अभी तक की स्थिति से स्पष्ट है कि मेट्रो शहरों में युवाओं के बीच इस नशे ने अपनी जगह बना ली है लेकिन यह नशा अब तक किस हद तक फैल चुका है, इसके बारे में अध्ययन जरूरी है। इसीलिए एम्स के डॉक्टर न सिर्फ दिल्ली बल्कि नोएडा, गुडग़ांव, गाजियाबाद, चंडीगढ़, मुंबई सहित कई बड़े महानगरों को इस अध्ययन से जोडने जा रहे हैं। 

देश में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन दिल्ली में
पहली बार एम्स में इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ एडिक्शन मेडिसिन 2019 का आयोजन 13 से 16 नवंबर तक किया जा रहा है। इस दौरान नशे की लत में पड़ रहे युवाओं को मुक्त करने, उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर चर्चा की जाएगी। 

तेजी से शिकार हो रहे युवा
हाल में सामने आए एम्स के एक अध्ययन के अनुसार देश के 20 फीसदी पुरूष और 10 फीसदी महिलाएं नशे की लत के शिकार हैं। युवाओं को नशे के चलते चिढ़चिढ़ापन, गुस्सा, अकेलापन और मानसिक तनाव हो रहा है। नशे की लत 10 से 24 वर्ष आयु वर्ग के किशोर और युवाओं में तेजी से बढ़ी है।

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