डॉक्टरों का कहना है कि गर्भस्थ के दिल में यह एक अवरुद्ध वाल्व का गुब्बारा फैलाव है। इस प्रक्रिया को अल्ट्रासाउंड की मदद से की जाती है। इस प्रक्रिया में मां के पेट के माध्यम से बच्चे के दिल में एक सुई डाली गई। फिर गुब्बारे कैथेटर का उपयोग करके, रक्त प्रवाह में सुधार के लिए बाधित वाल्व को खोला गया।
इस प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों का दावा है कि भ्रूण का दिल बेहतर विकसित होगा और जन्म के समय हृदय रोग कम गंभीर होगा। डॉक्टर ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से भ्रूण के जीवन का खतरा हो सकता है। इसे अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाता है।
आम तौर पर एंजियोग्राफी के तहत ऐसी प्रक्रिया की जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं कर सकते थे। यहां सब कुछ अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन के तहत किया जाता है। इसे करने के लिए ज्यादा समय भी नहीं ले सकते थे, यदि समय ज्यादा लगता तो बच्चा मर सकता था। एम्स में कार्डियोथोरेसिक साइंसेज सेंटर की टीम के वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा यह प्रक्रिया महज 90 सेकंड में की गई।
एम्स में आई 28 वर्षीय गर्भवती महिला इससे पहले तीन बार गर्भपात हो चुका था। महिला अपने बच्चे को खोना नहीं चाहती थी। डॉक्टरों द्वारा बच्चे की हृदय की स्थिति के बारे में बताए जाने और परिणाम में सुधार की इच्छा के साथ प्रक्रिया के लिए सहमति देने के बाद माता-पिता वर्तमान गर्भावस्था को जारी रखना चाहते थे।