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Coronavirus Vaccine: एम्स में कोरोना वैक्सीन ट्रायल के लिए जरूरत 100 लोगों की, 24 घंटे में 1000 से ज्यादा मिले वॉलेंटियर

Mon, 20 Jul 2020 03:11 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • दस्तावेज में खामियों के चलते एथिक्स कमेटी के पास रुका हुआ था प्रस्ताव
  • अभी तक 12 में से केवल दो ही अस्पतालों में शुरू हो सका है परीक्षण
  • पहले चरण में 100 लोगों पर किया जाएगा परीक्षण
  • ट्रायल के लिए अब तक एक हजार से ज्यादा लोग संपर्क कर चुके हैं
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Coronavirus Vaccine: एम्स (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एम्स में कोरोना वायरस की वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू किया जाना है। शनिवार को अस्पताल ने एक नंबर जारी कर लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की थी। इसके बाद बीते 24 घंटे में वैक्सीन के परीक्षण में शामिल होने के लिए एक हजार से अधिक लोगों ने इच्छा जाहिर की है। इससे अस्पताल प्रशासन काफी उत्साहित नजर आ रहा है।

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एम्स में कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट के प्रमुख शोधकर्ता  प्रोफेसर डॉक्टर संजय ने कहा कि वालंटियर बनने के लिए जारी किए गए नंबर पर लगातार कॉल आ रहे हैं। पहले चरण के परीक्षण के लिए सिर्फ 100 लोगों की जरूरत है, लेकिन अब तक एक हजार से ज्यादा लोग संपर्क कर चुके हैं। अस्पताल में जल्द ही परीक्षण शुरू किया जाएगा।

एम्स ने कोरोना वैक्सीन के परीक्षण को दी मंजूरी
लंबे समय बाद एम्स, दिल्ली ने कोरोना वायरस की वैक्सीन के परीक्षण की अनुमति दे दी है। एम्स की एथिक्स कमेटी ने दस्तावेज की कमी के चलते अब तक इसे मंजूरी नहीं दी थी, लेकिन शनिवार को हुई बैठक में कंपनी की ओर से दोबारा दाखिल दस्तावेज की समीक्षा के बाद कमेटी ने परीक्षण शुरू करने का आदेश दिया है। अब दिल्ली एम्स में पहले फेज के दौरान 100 लोगों पर परीक्षण किया जाएगा। 
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दरअसल, कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर भारत बायोटेक कंपनी ने हैदराबाद स्थित जीनोम वैली की अत्याधुनिक लैब में एक इनएक्टिव वायरस पर अध्ययन के बाद कोवैक्सीन को तैयार किया है। इस पर फिलहाल देश के 12 अस्पतालों में फेज एक और दो का एकसाथ परीक्षण होना है।

1120 लोगों पर होने वाले इस परीक्षण का सबसे बड़ा और अहम भाग दिल्ली एम्स में होने वाला है। सोमवार से यहां वालंटियरों के पंजीयन शुरू होंगे। करीब 200 लोगों को एम्स में वैक्सीन की डोज दी जाएगी।

भारत सरकार के डीबीटी मंत्रालय की सचिव रेणु स्वरूप का कहना है कि एक वैक्सीन के पहले और दूसरे फेज के परीक्षण में कम से कम 60 दिन का वक्त लगता है। यह एक प्रोटोकॉल पूरी दुनिया में पहले से तय है। हालांकि इसके बाद भी परीक्षण के परिणाम इत्यादि के अध्ययन में भी समय लगता है। 

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इस नंबर पर फोन कर करा सकते हैं पंजीयन

दिल्ली एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के डॉ. संजय कुमार राय ने बताया कि एथिक्स कमेटी की ओर से आखिरकार वैक्सीन परीक्षण को अनुमति मिल चुकी है। अब पंजीयन का कार्य शुरू होगा। एक स्वस्थ व्यक्ति (जोकि शत प्रतिशत कोरोना मुक्त हो) को ही डोज दी जा सकती है।

इससे पहले उक्त व्यक्ति की पूरी चिकित्सीय जांच होगी, जिसमें कोरोना वायरस और एंटीबॉडी की जांच भी शामिल हैं। इसके बाद ही उसे परीक्षण के लिए मान्य माना जा सकता है। डोज देने के दो से चार घंटे तक संबंधित व्यक्ति में कोई दुष्प्रभाव नहीं मिलने पर उसे घर भेज दिया जाएगा।

चूंकि यह अध्ययन प्लासबो और ब्लाइंड वैज्ञानिक सिद्धांत पर है। इसलिए एक समूह को वैक्सीन की डोज और दूसरे को डुप्लीकेट वैक्सीन या अन्य तरल पदार्थ दिया जाएगा जिसके बारे में उस व्यक्ति को भी जानकारी नहीं होगी जिसे यह दिया जा रहा है। 

अभी तक दो ही जगह शुरू हुआ परीक्षण
अलग- अलग राज्यों के चिकित्सीय संस्थानों को वैक्सीन परीक्षण की जिम्मेदारी मिली है लेकिन अभी तक दो ही जगह पर इसका परीक्षण शुरू हुआ है। इनमें से एक हैदराबाद और दूसरा रोहतक पीजीआई है। हैदराबाद में करीब 125 लोगों को यह डोज दी जाएगी, जबकि रोहतक पीजीआई में 10 से 15 लोगों पर यह परीक्षण किया जा सकता है। हालांकि यह संख्या बढ़ भी सकती है। 

यहां करा सकते हैं पंजीयन
अगर आप कोरोना वैक्सीन के इस परीक्षण में शामिल होना चाहते हैं तो दिल्ली एम्स ने फोन नंबर 7428847499 जारी किया है। इस पर कॉल कर अपना पंजीयन करा सकते हैं। 

इसलिए अब तक नहीं मिली थी मंजूरी
दिल्ली एम्स में शोध व चिकित्सीय अध्ययन को लेकर एक एथिक्स कमेटी पहले से ही गठित है जिसमें संस्थान के 16 वरिष्ठ डॉक्टर व अधिकारी शामिल हैं। इस कमेटी में आवेदन की पूरी जांच, परख और दस्तावेज की पूर्ति होने के बाद ही मंजूरी दी जाती है। इसके बाद दिल्ली एम्स में किसी भी तरह का शोध या अध्ययन शुरू होता है। आमतौर पर भारतीय चिकित्सा में यह माना जाता है कि दिल्ली एम्स में सबसे ज्यादा कड़े और एहतियात बरतने वाले कानून हैं।
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