दिल्ली एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के डॉ. संजय कुमार राय ने बताया कि एथिक्स कमेटी की ओर से आखिरकार वैक्सीन परीक्षण को अनुमति मिल चुकी है। अब पंजीयन का कार्य शुरू होगा। एक स्वस्थ व्यक्ति (जोकि शत प्रतिशत कोरोना मुक्त हो) को ही डोज दी जा सकती है।
इससे पहले उक्त व्यक्ति की पूरी चिकित्सीय जांच होगी, जिसमें कोरोना वायरस और एंटीबॉडी की जांच भी शामिल हैं। इसके बाद ही उसे परीक्षण के लिए मान्य माना जा सकता है। डोज देने के दो से चार घंटे तक संबंधित व्यक्ति में कोई दुष्प्रभाव नहीं मिलने पर उसे घर भेज दिया जाएगा।
चूंकि यह अध्ययन प्लासबो और ब्लाइंड वैज्ञानिक सिद्धांत पर है। इसलिए एक समूह को वैक्सीन की डोज और दूसरे को डुप्लीकेट वैक्सीन या अन्य तरल पदार्थ दिया जाएगा जिसके बारे में उस व्यक्ति को भी जानकारी नहीं होगी जिसे यह दिया जा रहा है।
अभी तक दो ही जगह शुरू हुआ परीक्षण
अलग- अलग राज्यों के चिकित्सीय संस्थानों को वैक्सीन परीक्षण की जिम्मेदारी मिली है लेकिन अभी तक दो ही जगह पर इसका परीक्षण शुरू हुआ है। इनमें से एक हैदराबाद और दूसरा रोहतक पीजीआई है। हैदराबाद में करीब 125 लोगों को यह डोज दी जाएगी, जबकि रोहतक पीजीआई में 10 से 15 लोगों पर यह परीक्षण किया जा सकता है। हालांकि यह संख्या बढ़ भी सकती है।
यहां करा सकते हैं पंजीयन
अगर आप कोरोना वैक्सीन के इस परीक्षण में शामिल होना चाहते हैं तो दिल्ली एम्स ने फोन नंबर 7428847499 जारी किया है। इस पर कॉल कर अपना पंजीयन करा सकते हैं।
इसलिए अब तक नहीं मिली थी मंजूरी
दिल्ली एम्स में शोध व चिकित्सीय अध्ययन को लेकर एक एथिक्स कमेटी पहले से ही गठित है जिसमें संस्थान के 16 वरिष्ठ डॉक्टर व अधिकारी शामिल हैं। इस कमेटी में आवेदन की पूरी जांच, परख और दस्तावेज की पूर्ति होने के बाद ही मंजूरी दी जाती है। इसके बाद दिल्ली एम्स में किसी भी तरह का शोध या अध्ययन शुरू होता है। आमतौर पर भारतीय चिकित्सा में यह माना जाता है कि दिल्ली एम्स में सबसे ज्यादा कड़े और एहतियात बरतने वाले कानून हैं।