अज्ञात शवों व लापता लोगों की पहचान होगी आसान
पोर्टल पर अपलोड होंगी तस्वीरें, शरीर के निशान, कपड़े व डीएनए प्रोफाइल
परिवार वाले कर सकेंगे मिलान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में हर साल 50 हजार से अधिक अज्ञात शव मिलते हैं। साल 2023 में 4.84 लाख लोग लापता बताए गए। परिवार सालों अपनों को ढूंढते रहते हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए एम्स नई दिल्ली के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग ने आईसीएमआर के सहयोग से उम्मीद नाम का देश का पहला राष्ट्रीय डीएनए डेटाबेस व पहचान पोर्टल बनाया है। इसका मोटो है आज अनजान, कल पहचान।
पोर्टल पर अज्ञात शवों की तस्वीरें, शरीर की माप, टैटू, निशान, कपड़े व डीएनए प्रोफाइल की जानकारी रखी जाती है। देशभर के अस्पतालों व केंद्रों से यह जानकारी जुड़ती है, एम्स नई दिल्ली मुख्य केंद्र है। जब अज्ञात शव मिलता है तो डीएनए जांच कर पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। परिवार वाले पोर्टल पर जाकर तस्वीरें व विवरण देख सकते हैं। संभावित मिलान लगने पर संबंधित पुलिस स्टेशन या केंद्र से संपर्क किया जाता है, फिर परिवार सदस्य का डीएनए सैंपल लेकर मिलान करवाया जाता है।
एम्स का कहना है कि यह पहल परिवारों को राहत देगी व पुलिस जांच में मदद करेगी। अब अज्ञात शवों को बिना पहचान के दफनाने या जलाने की जरूरत कम होगी। यह प्रणाली पूरे देश में फैलाई जा रही है ताकि अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंच बने। उम्मीद से हजारों परिवारों को अपने अपनों से मिलने की आस जगी है।