आईजीआई एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए पार्किंग व्यवस्था को हाईटेक बनाया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एल्गोरिदम से पार्किंग के खाली स्लॉट, एंट्री और एक्जिट प्वाइंट का सटीक ब्यौरा मिलेगा। इसके लिए अत्याधुनिक सेंसर से लेकर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। यहां पर वाहन लेकर आने वाले लोग पार्किंग के लिए कतार में वाहन खड़ा करने से बचेंगे और उपलब्ध स्लॉट के पार्किंग की स्थिति के बारे में जानकारी जुटा सकेंगे।
प्रबंधन ने परियोजना को लागू करने के लिए निविदा जारी कर दी है। यह सिस्टम मुख्य रूप से जनरल एविएशन (जीए) एनेक्स भवन के आसपास स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही जनरल एविएशन स्टाफ बिल्डिंग के पास एमएस फेंडर कार्य भी प्रस्तावित है, जिससे सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। निविदा के तहत योग्य एजेंसियों का चयन किया जाएगा, जो इस परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करेंगी।
ऐसे काम करेगा पार्किंग ऑक्यूपेंसी सॉल्यूशन
पार्किंग ऑक्यूपेंसी सॉल्यूशन के तहत लगाए जाने वाले डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड यात्रियों को यह बताएंगे कि किस पार्किंग जोन में कितने स्लॉट उपलब्ध हैं। इससे चालक सीधे उसी स्थान की ओर जा सकेंगे जहां पार्किंग खाली है। भविष्य में इस सिस्टम को मोबाइल एप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी जोड़ने की योजना बनाई जा सकती है, ताकि यात्रियों को एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही पार्किंग की स्थिति की जानकारी मिल सके।
ग्राउंड पावर यूनिट के लिए शुरू होगा इलेक्ट्रिकल कार्य
एयरपोर्ट प्रबंधन ने एलएम ब्लॉक में ग्राउंड पावर यूनिट (जीपीयू) और प्री-कंडीशन्ड एयर (पीसीए) सिस्टम के लिए इलेक्ट्रिकल कार्य शुरू करने की योजना बनाई है। जीपीयू सिस्टम विमान को जमीन पर खड़े रहने के दौरान बिजली की आपूर्ति करता है, जिससे विमान के इंजन को चालू रखने की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं, पीसीए सिस्टम विमान के अंदर तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। दोनों प्रणालियों के उपयोग से ईंधन की खपत में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन घटेगा।
प्रतिदिन यात्रा करते हैं 2.5 लाख यात्री
आईजीआई पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां से से प्रतिदिन 1 लाख से अधिक यात्री यात्रा करते हैं। यह भारत का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, जो प्रतिदिन लगभग 1400 से 1550 उड़ानें संभालता है। इससे पार्किंग स्थलों पर दबाव भी बढ़ गया है। पीक आवर्स के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब लोगों को पार्किंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
एमएस फेंडर कार्य से बढ़ेगी पार्किंग क्षेत्र की सुरक्षा
वहीं, एमएस फेंडर कार्य के जरिये पार्किंग क्षेत्र की सुरक्षा को बढ़ाया जाएगा। फेंडर का उपयोग आमतौर पर वाहनों की टक्कर से संरचनाओं को बचाने के लिए किया जाता है। इससे पार्किंग एरिया और जनरल एविएशन स्टाफ बिल्डिंग के आसपास दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहेगा। प्रबंधन का कहना है कि एयरपोर्ट पर इस तरह के स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर दी जाएगी जानकारी
नई तकनीक के तहत पार्किंग क्षेत्रों में अत्याधुनिक सेंसर और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ये उपकरण पार्किंग स्लॉट की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे और डाटा को एआई एल्गोरिदम के जरिये प्रोसेस करेंगे। जानकारी डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और अन्य माध्यमों से यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी।