नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए दिल्ली-एनसीआर के लिए दिशानिर्देश जारी किए। एजेंसियों ने भी एनजीटी का साथ दिया और दिशानिर्देश के उल्लंघन पर जमकर जुर्माना भी लगाया। बावजूद हालात जस के तस बने हैं।
आलम यह है कि एक वर्ष में नोएडा प्राधिकरण ने एनजीटी के निर्देश न मानने के कारण करीब चार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया, लेकिन प्रदूषण कम नहीं हो पाया।
प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए जितनी भी जरूरी कवायद एनजीटी ने करने को कहा सब की गई। सबसे ज्यादा बिल्डर साइट पर औचक निरीक्षण किया गया। यहां खुले में हो रहे निर्माण, निर्माण सामग्रियों को ढककर नहीं रखने, साइट के पास पानी का छिड़काव नहीं करने से धूल उड़ने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला गया।
यही नहीं सड़कों पर ढककर निर्माण सामग्री नहीं ले जाने पर भी ठेकेदारों पर जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा छोटे-छोटे ठेकेदारों व निजी तौर पर मकान बना रहे लोगों से भी 5 से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूला गया। जगह-जगह कूड़ा जलाने पर भी कार्रवाई की गई। इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों पर भी प्रदूषण पर लगाम न लगा पाने से जुर्माना लिया गया।