मुस्लिम समाज में अब बेटा और बेटी पक्ष द्वारा दहेज न लेने-देने का शपथ पत्र देने के बाद ही इमाम निकाह करा सकेंगे। यदि कोई पक्ष शपथ पत्र देने के बावजूद दहेज लेता-देता है, तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
यही नहीं मां-बाप की जायदाद में लड़की को बराबरी का हिस्सा देने की बात पर भी मोहर लगाई गई है। शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद अल-अमन इस्लामिक दावत केंद्र की तरफ से बड़कली चौक पर बुलाई गई पंचायत में सर्वसम्मति से ये फैसले लिए गए।
निकाह से पहले शपथ पत्र पर दोनों पक्षों व मौजिज लोगों के हस्ताक्षर कराने अनिवार्य होंगे। इसके बाद यह हलफनामा निकाह पढ़ाने वाले मौलाना के समक्ष पेश करना होगा।
मौजूद लोगों के सामने इसे पढ़कर भी सुनाया जाएगा। लोगों को दहेज लेने-देने वाली शादियों में शरीक न होने का फरमान भी सुनाया गया है। वैवाहिक फिजूलखर्ची को रोकने के लिए कई रस्मो-रिवाज पर पाबंदी लगाने और निकाह से पहले शपथ पत्र देने का ऐलान मौलाना हकीमुद्दीन सनाबली ने किया।
मुफ्ती सलीम साकरस ने फैसले का समर्थन किया। पंचायत ने शादी से पहले लड़की देखने को जायज करार दिया। कहा कि कुरान और हदीस की रोशनी में लड़की देखना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो। वहीं पंचायत ने दूरसंचार के माध्यमों से लिए और दिए जा रहे तलाक को गैर-इस्लामी बताया।