देशभर में चल रहे ‘मी टू’ अभियान को देखते हुए जिला प्रशासन कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम-2013 को सख्ती से लागू कराने की तैयारी में है। जिले में मौजूद कंपनियों का सेफ्टी ऑडिट शुरू कर दिया गया है।
करीब 3000 ऐसी कंपनी पाई गई है, जिन्होंने महिला सेफ्टी रिटर्न फाइल नहीं किया है। अब जिला प्रशासन ने इनसे जवाब तलब करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन कंपनियों में विभिन्न उत्पादन संबंधी उद्योग, सर्विस बेस्ड कंपनी, स्टार्टअप समेत अन्य कार्यस्थल शामिल हैं।
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए 9 दिसंबर 2013 को लागू इस अधिनियम के तहत जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं, उन पर यह लागू होता है। इसके तहत सबसे पहले हरियाणा में गुरुग्राम में जिला स्तरीय स्थानीय शिकायत समिति (एलसीसी) का गठन किया गया था।
उसने सर्वे के दौरान पाया कि करीब 5500 कंपनियां गुरुग्राम में संचालित हैं। इनमें बड़ी एवं मध्यम दर्जे के करीब 2500 कंपनियों ने यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम के तहत सुरक्षा ऑडिट कर रिपोर्ट दी है, जबकि बाकी कंपनियों ने जानकारी ही नहीं दी है।