साइबर सिटी को 'महाजाम' से बचाने के लिए चार लेन का 'आउटर रिंग रोड' बनेगा। इसके लिए एनएचएआईए (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने पूरा खाका तैयार किया है।
जो शहर को बाईपास करते हुए सीधे दिल्ली को जोड़ेगा। आउटर रिंग रोड के लिए 50 फीसदी खर्च केंद्र सरकार और बाकी 50 फीसदी राज्य सरकार को देना होगा। मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। तीन वर्ष में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हाल ही में बारिश और जलभराव के बाद गुडग़ांव में महाजाम लगा था। जिसकी वजह से पूरी रोड की यातायात व्यवस्था चौपट हो गई थी। जिसकी वजह से दिल्ली-गुडग़ांव कनेक्टिविटी को लेकर नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया था। एनएचएआईए ने इसे लेकर नया विकल्प दिया है, जो शहर को बाईपास करते हुए आउटर रिंग रोड के जरिये गुडग़ांव-दिल्ली को जोड़ेगा।
एनएचएआईए द्वारा प्रस्तावित 32 किलोमीटर लंबे रिंग रोड का 30.6 किलोमीटर साइबर सिटी के हिस्से में हैं और बाकी 1.6 किलोमीटर दिल्ली के क्षेत्र में आएगा। एनएचएआईए के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अशोक कुमार शर्मा ने 'अमर उजालाÓ को बताया कि इसके लिए 290 हेक्टेयर जमीन की जरुरत होगी। 14.4 हेक्टेयर जमीन दिल्ली को और बाकी 275.4 हेक्टेयर जमीन हरियाणा को देना होगा। जमीन मिलने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।
यह होगा रूट प्लान
आउट रिंग रोड की शुरुआत दिल्ली-गुडग़ांव सिरहौल बॉर्डर से शुरू होगा। घाटा के नजदीक सेक्टर-56, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, बादशाहपुर, नौरंगपुर होते हुए एनएसजी के नजदीक मानेसर से होते हुए यह दिल्ली में प्रवेश करेगा। इस चार लेन रोड के अलावा सर्विस रोड और ड्रेन सुविधा भी होगी। हालांकि 20 फीसदी जमीन वन क्षेत्र में आता है, जिसे लेकर दिक्कत हो सकती है।
एक तरफ 90 मीटर चौड़ी होगी रोड
एनएचएआई के फिजिबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक दो लेन की लंबाई 90 मीटर होगी। 30 मीटर का ग्रीन बेल्ट सड़क के दोनों तरफ होगी। इसके अलावा गुडग़ांव से दिल्ली और दिल्ली से गुडग़ांव की तरफ मुडने के लिए कई महत्वपूर्ण जगहों पर यू-टर्न की सुविधा दी गई है। एनएचएआईए का दावा है कि इससे लोगों की आवाजाही को आसान बनाया जा सकेगा। कई जगहों पर जरूरत के हिसाब से फ्लाईओवर भी बनाया जा सकता है।
अशोक कुमार शर्मा, प्रोजेक्ट निदेशक, एनएचएआई: एनएचएआईए ने पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। दिल्ली और हरियाणा दोनों के स्थानीय निकाय को जमीन देने के लिए कहा गया है। इस रोड के निर्माण से नेशनल हाईवे-8 का ट्रैफिक दबाव कम होगा। एनएचएआईए द्वारा न्यूनतम तीन वर्ष में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जमीन मिलने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। जो ग्रीन बेल्ट आसानी से उपलब्ध है, जिस पर किसी तरह की आपत्ति नहीं है, उसे भी इस्तेमाल किया जा सकता है।