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Delhi Excise Policy Case: जज स्वर्णकांता शर्मा की मामले से दूरी के बाद अरविंद केजरीवाल बोले- सत्य की जीत हुई

Thu, 14 May 2026 11:04 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

आरोपियों ने न्यायमूर्ति शर्मा पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि उनके बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से काम लेते हैं, जो सीबीआई की ओर से इस मामले में पैरवी कर रहे हैं। जस्टिस शर्मा ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा था कि बिना आधार के पक्षपात का भय जताकर जज रिक्यूजल नहीं कर सकते।
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न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई दूसरी पीठ करेगी। दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा अब इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगी। इसके बाद आम आदमी पार्टी (आप) संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, "सत्य की जीत हुई। गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई।" बृहस्पतिवार को दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने अदालत और उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों पर संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि वह चुप नहीं रह सकतीं और अवमानना कार्रवाई शुरू करेंगी। आबकारी मामले की सुनवाई अब दूसरी पीठ करेगी।

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न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि वे आबकारी नीति मामले के कुछ बरी किए गए आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके और अदालत के खिलाफ की गई अत्यंत अपमानजनक, मानहानिकारक और घृणित टिप्पणियों पर चुप नहीं रह सकती हैं। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट कहा कि मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ प्रत्यर्थी मेरे खिलाफ और इस अदालत के खिलाफ बेहद घृणित, अवमाननापूर्ण और मानहानिकारक सामग्री पोस्ट कर रहे हैं। मैं चुप नहीं रह सकती। मैंने कुछ प्रत्यर्थियों और अन्य अवमाननाकर्ताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने का फैसला कर लिया है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि वह खुद को इस मामले से अलग नहीं कर रही हैं। हालांकि, आबकारी मामले की सुनवाई अब एक अन्य पीठ द्वारा की जाएगी।


यह टिप्पणी सीबीआई द्वारा दायर उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। निचली अदालत ने फरवरी में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया था। 
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न्यायमूर्ति ने 20 अप्रैल को केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य की ओर से लगाई गई रिक्यूजल याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपियों ने अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से पेश होने से इनकार कर दिया और “महात्मा गांधी के सत्याग्रह” का रास्ता अपनाने की घोषणा की। अदालत ने पहले ही तीन सीनियर वकीलों को अमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त करने का फैसला किया था, ताकि बिना प्रतिनिधित्व वाले आरोपियों (केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक) का पक्ष सुना जा सके। 
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