दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल में भर्ती फरहान (तीन वर्षीय) की जिंदगी और मौत से जंग जारी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को वेंटिलेटर मुहैया नहीं करवाया है। अस्पताल में भर्ती बच्चे को परिजन अंबू बैग से सांस देने को मजबूर हैं। वहीं, डॉक्टरों का तर्क है कि बच्चे का लीवर व किडनी ने काम करना बंद कर दिया है और ब्रेन डैड हो चुका है। इसलिए वेंटिलेटर देने पर भी बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकती है।
लोकनायक अस्पताल में भर्ती बच्चे के पिता अशफाक का कहना है कि डॉक्टर हमें यह कह रहे हैं कि बच्चे के लिवर और किडनी ने काम करना बंद कर दिया है। ऐसे में वेंटिलेटर देने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन जब मेरे बेटे को वेंटिलेटर की जरूरत थी, तब उसे वेंटिलेटर नहीं दिया गया। डॉक्टर मेरे बेटे का ब्रेन डैड बता रहे हैं, लेकिन वह मूवमेंट कर रहा है। जब उसके पैर पर हम हाथ लगाते हैं या चिकोटी काटते हैं तो वह हिलता है। यदि ब्रेन डैड होता तो ऐसा कोई रिएक्शन ही नहीं देता। डॉक्टर यह भी कह रहे हैं कि बच्चा ज्यादा से ज्यादा 10 दिन तक जीवित रह सकता है, इसलिए आप इसे या तो घर ले जाएं या फिर अंबू बैग के सहारे सांस देते रहें। इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है। अशफाक ने रोते हुए कहा कि जो मुझसे बाद में आया था, उसे वेंटिलेटर दे दिया गया। लेकिन मेरे बच्चे को वेंटिलेटर नहीं मिला। अस्पताल या सरकार से मेरी कोई दुश्मनी नहीं है। मेरे बच्चे को वेंटिलेटर दे दिया जाए और उसे बचा लिया जाए। गौरतलब है कि इस मामले को लेकर शुक्रवार को दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट में अपना जवाब भी दाखिल करना है।
बच्चे का ब्रेन डैड, बचाना मुश्किल
बच्चे का ब्रेन डैड हो चुका है, ऐसे में उसे वेंटिलेटर देने से भी नहीं बचाया जा सकता। इसलिए वेंटिलेटर नहीं दिया गया है। उसके अंगों ने भी धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया है।
-डॉ किशोर सिंह, डायरेक्टर, लोकनायक अस्पताल