बच्चों की तबियत बिगड़ने के बाद स्कूल में इलाज कराने की वजह से उन्हें घर पहुंचने में देरी होने वाली थी। इसलिए स्कूल प्रबंधन को मजबूरी में बच्चों के अभिभावकों को सूचित करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को सूचित करने के साथ ही चेतावनी भी दी कि वह इस संबंध में मीडिया को कोई जानकारी न दें न ही कहीं शिकायत करें, अन्यथा उनके बच्चे को स्कूल से निकाल दिया जाएगा।
बीमार बच्चों को छोड़ स्कूल के अधिकारी चले गए घर
स्कूल प्रबंधन की लापरवाही का आलम ये है कि बीमार बच्चों को निचले स्तर के कर्मचारियों के भरोसे छोड़ शाम को ज्यादातर अधिकारी घर चले गए। मामले में स्कूल के वित्त अधिकारी सुजीत पांडेय से दो बार बात करने का प्रयास किया गया। पहली बार शाम 6:02 बजे सुजीत पांडेय ने घटना की जानकारी से इंकार कर दिया। दूसरी बार शाम 7:16 बजे सुजीत पांडेय ने बताया कि वह रास्ते में हैं और गाड़ी चला रहे हैं। करीब एक घंटे में स्कूल पहुंचकर कुछ बता सकेंगे। फिलहाल उनके पास कोई जानकारी नहीं है।
2016 में भी हुई है ऐसी घटना
बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में भी स्कूल में इस तरह का हादसा हो चुका है। उस वक्त स्कूल प्रबंधन ने सत्ता में मजबूत पकड़ होने की वजह से पुलिस-प्रशासन को चंगुल में ले लिया था। बताया जा रहा है कि स्टेप बाई स्टेप स्कूल प्रबंधन की शासन स्तर के अधिकारियों और राजनीतिक गलियारे में मजबूत पकड़ है। इसी वजह से स्कूल प्रबंधन ने घटना के बाद जांच करने पहुंची टीम को अंदर तक घुसने नहीं दिया।