वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से ब्रांडेड फैशन रिटेल व गारमेंट इंडस्ट्री भयभीत है। टैक्स स्लैब में बदलाव को ध्यान में रखते हुए पुराने स्टॉक को निकालने की तैयारी शुरू कर दी है। पुराने स्टॉक के खत्म करने के लिए ऑफर की शुरुआत कर दी गई है। इसके कारण मानसून से पहले ही खरीदारों के लिए मौज हो रही है।
विभिन्न कंपनियों द्वारा अलग-अलग उत्पादों पर 50 फीसदी तक की छूट दी जा रही है। दरअसल, फैशन रिटेल ब्रांड अमूमन हर साल जुलाई के बाद सीजन खत्म होने पर छूट देते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने जून में ही इसकी शुरुआत कर दी है।
एक जुलाई से जीएसटी लागू हो रहा है और कंपनियां उससे पहले ही अपना स्टॉक खपाना चाहती हैं। प्यूमा, बाटा, कॉब, बिग बाजार, ओनली, जैक एंड जोंस तथा वेरो मोडा जैसी दर्जनों कंपनियों ने अपनी सेल शुरू कर दी है।
जबकि पेंटालूंस, लाइफ स्टाइल और शॉपर्स स्टॉप जैसी रिटेल चेन ने अभी तक सीजन के खत्म होने पर होने वाली सेल की औपचारिक शुरुआत नहीं की है, लेकिन वे अपने कुछ ब्रांडों पर 20 से 40 फीसदी छूट दे रही हैं।
सेल को एक साथ मिला कर बिक्री शुरू
शॉपर्स स्टॉप के मालिकाना हक वाले हाइपर मार्केट चेन हाइपरसिटी ने सीजन खत्म होने पर दी जाने वाली छूट और सालाना सेल को एक साथ मिला कर बिक्री शुरू कर दी है। बता दें साइबर सिटी एनसीआर का बड़ा रिटेल बाजार है।
यहां पर सभी बड़ी कंपिनयों के रिटेल चेन मौजूद है। यहां प्रति दिन एक अनुमान के मुताबिक 50 लाख से अधिक का कारोबार होता है। अभी सभी कपड़ों पर वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) लागू होता है।
कॉब डेनिम के स्टोर मैनेजर अविनाश का कहना है कि स्टोर में करीब 7 हजार पीस हैं, जिसे इसी महीने बेचना है। प्रबंधन की ओर से पुराना माल बेचने को कहा गया है। क्योंकि जुलाई में आने वाले माल की अलग कीमत होगी। इसलिए 35-50 फीसदी पर माल बेचना शुरू कर दिया है।
क्यों भयभीत है रिटेल इंडस्ट्री
-आयकर विशेषज्ञ सीए अमन बहल कहते हैं कि उम्मीद थी कि आवश्यक आवश्यकता होने के कारण टेक्सटाइल को जीएसटी से छूट मिलेगी। लेकिन यह तय हो गया कि टेक्सटाइल उद्योग जीएसटी में रहेगा।
फैब्रिक जैसे सेग्मेंट के जो अभी तक टैक्स चेन से बाहर थे वहां अंतर पड़ेगा। ड्रेस मटेरियल, साड़ी आदि पर टैक्स नहीं था अब वो भी टैक्स स्लैब में आ जाएंगे। अब कॉटन के कपड़ों पर पहली बार 5 फीसदी और हैंडमेड कपड़ों पर 18 फीसदी टैक्स लगा है, इसलिए यह दोनों ही तरह के कपड़े महंगे हो जाएंगे।
सीए अमन ने बताया कि कॉटन पर पहले किसी तरह का टैक्स नहीं लगता था अब उस पर पांच प्रतिशत टैक्स लगेगा। मतलब साफ है, कॉटन के कपड़े हर हाल में महंगे होंगे। सरकार ने अब एक हजार रुपये से ज्यादा के ब्रांडेड कपड़ों पर 12 फीसदी जीएसटी तय कर दी है। पहले भी एक्साइज और वैट मिलाकर 12 फीसदी ही टैक्स लगता था, ऐसे में इन कपड़ों की कीमतों में अंतर नहीं आएगा।