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डीपीएस में मासूम का रेप: परिजनों ने पूछे ऐसे सवाल, स्कूल यस-नो में नहीं दे पा रहा जवाब

Mon, 16 Jul 2018 07:27 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,ग्रेटर नोएडा
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dps school
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डीपीएस में बच्ची से दरिंदगी के विरोध में अभिभावकों का न केवल आक्रोश फूटा बल्कि उन्होंने पीड़ा व्यक्त करते हुए स्कूल प्रबंधन पर सवालों की बौछार कर दी। आक्रोश और पीड़ा से सराबोर अभिभावकों के कई सवाल का जवाब प्रिंसिपल नहीं दे पाईं। इसके चलते कई बार अभिभावक और प्रिंसिपल की बातचीत के दौरान हंगामा हुआ।        

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प्रिंसिपल और अभिभावक की बातचीत में सवाल करते हुए एक महिला अभिभावक ने कहा कि हम अपनी फूल जैसे बच्ची को केवल पति के अलावा किसी के पास नहीं छोड़ते। आपने किसी पुरुष के पास हमारी बच्चियों को स्वीमिंग पूल में कैसे छोड़ दिया। एक अन्य अभिभावक ने कहा कि हम अगर फीस देने में एक दिन की भी लापरवाही करते हैं तो डीपीएस प्रबंधन हमसे पेनल्टी लेता है।

अब हमारी बच्चियों के साथ इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है, तो डीपीएस को भी पेनल्टी (कानूनी कार्रवाई) लगनी चाहिए। एक पूर्व महिला अभिभावक भी स्कूल पहुंची और उसने बेटे के उत्पीड़न के चलते अपने बेटे का नाम काटने का आरोप लगाया।
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महिला का कहना था कि उसका बेटा थोड़ा कमजोर था। इसलिए अन्य बच्चों से कहा जाता था कि उससे दूर बैठा करें। इस पर उन्होंने प्रबंधन को मेल किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने बच्चे का नाम कटा लिया। एक अभिभावक ने स्कूल में बच्चों को लाने ले जाने के लिए सफेद बस का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया।

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‘दरिंदगी हुई या नहीं यस और नो’  

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
‘दरिंदगी हुई या नहीं यस और नो’       
एक महिला अभिभावक ने प्रिंसिपल से पूछा कि आप अभिभावकों को मैसेज और वीडियो भेजकर ये कह रही हैं कि ये वारदात नहीं हुई। जबकि सच सबके सामने हैं। हम आपसे जानना चाहते हैं कि स्कूल में बच्ची से दरिंदगी हुई या नहीं। यस और नो कहकर अभिभावक देर तक हूटिंग करते रहे लेकिन प्रिंसिपल ने हां या ना कुछ नहीं कहा। 

‘हॉर्स राइडिंग के नाम पर बच्चियों को छूता है पुरुष स्टाफ’       
एक पुरुष अभिभावक ने बताया कि मेरी बच्ची मुझे बताती है कि हार्स राइडिंग के दौरान मैडम धूप से बचने के लिए छाया में बैठ जाती हैं और पुरुष स्टाफ बच्चियों को पकड़कर हॉर्स पर बैठाता और उतारता है। बच्ची की शिकायत के बाद मैंने हार्स राइडिंग में बच्ची को भेजना बंद कर दिया लेकिन अन्य बच्चियों को ये सब आज भी झेलना पड़ रहा होगा।        
    
बचाव में जुटा है प्रबंधन, जबकि कार्रवाई होनी चाहिए        
कुछ अभिभावकों से इस पूरे मामले को लेकर अलग से बात की गई। उनसे पूछा गया कि आप पूरे मामले को कैसे देखते हैं और क्या चाहते हैं। 
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