अध्यक्ष शीला दीक्षित के निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के संकट का सामना कर रही है। कांग्रेस को दिल्ली में शीला दीक्षित जैसा कोई दूसरा दिग्गज चेहरा नजर नहीं आ रहा है।
कांग्रेस के लिए चुनौती यह भी है कि छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव है। इसके लिए हर तबके को साधना बेहद जरूरी है। लोकसभा चुनाव में आप पर मिली बढ़त के बाद कांग्रेस के रणनीतिकार मानकर चल रहे थे कि शीला दीक्षित के नेतृत्व में पार्टी पुराने जनाधार को वापस ला सकती है।
कांग्रेस की कमान अब किसके हाथ होगी, इसका आसान जवाब फिलहाल नहीं है। पार्टी के अंदर गुटबाजी को देखते हुए रणनीतिकारों को भी नए खेवनहार का नाम नहीं सूझ रहा है।
मौजूदा स्थिति में दिल्ली में ऐसा कोई चेहरा नहीं दिखाई दे रहा, जो शीला दीक्षित का उत्तराधिकारी होने का दावा कर सके। बताया जा रहा है कि हाईकमान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, जयप्रकाश अग्रवाल, डॉ. अशोक वालिया, अरविंदर सिंह लवली, हारुन यूसुफ, शर्मिष्ठा मुखर्जी समेत अन्य कार्यकारी अध्यक्षों के नाम पर चर्चा तो की है, लेकिन शीला के जाने के बाद कांग्रेस में जो खालीपन दिखाई दे रहा है, उसे भरना इनके लिए बेहद मुश्किल चुनौती होगा।