दिल्ली विश्वविद्यालय में अब छात्र अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। डीयू प्रॉक्टर नीता सहगल की ओर से 16 फरवरी को जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि अब छात्र अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते।
यदि छात्र कैंपस में प्रदर्शन करेंगे तो उनके खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय एक्ट 1922 के आर्डिनेंस 15-बी 3(1) के तहत अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जाएगी। एडवाइजरी में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन से कैंपस में शैक्षणिक गतिविधियां बाधित होती हैं।
प्रशासन की इस एडवाइजरी का छात्र संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। एनएसयूआई ने इस एडवाइजरी को अलोकतांत्रिक और तुगलकी फरमान बताया है। एनएसयूआई के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लाकरा ने कहा कि एनएसयूआई इस तुगलकी फरमान के खिलाफ भी अपनी आवाज उठाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को विश्वविद्यालय परिसर में नहीं उठाएंगे तो कहां उठाएंगे। यह फरमान लोकतंत्र को कमजोर करने का काम करेगा। प्रशासन को इस फरमान को वापस लेना ही होगा। जब तक प्रशासन इस फरमान को वापस नहीं लेता, तब तक इसका विरोध जारी रहेगा।