वहीं, इतनी ही संख्या में छत्तीसगढ़ सरकार भी कंपनी से रैपिड टेस्टिंग किट खरीद चुकी है। कंपनी सूत्रों के मुताबिक कोरिया से भी कोविड-19 की जांच के लिए कंपनी से किट की मांग की गई है। कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि इस समय कंपनी में एक दिन में 3-4 लाख किट का उत्पादन हो रहा है। केंद्र सरकार के साथ ही अन्य राज्य सरकारों ने भी कंपनी से रैपिड टेस्टिंग किट की मांग की है।
इसलिए रद्द हुआ चीन का ऑर्डर :
राज्य सरकार ने चीन को एक लाख रैपिड टेस्टिंग किट का ऑर्डर दिया था। कहा जा रहा है कि चीन से आयातित किट के जरिये देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले कोविड-19 टेस्ट फेल हो रहे हैं तो किट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, चीन की तरफ से किट की आपूर्ति में देरी भी ऑर्डर रद्द करने की वजह बनी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल से बात की और फिर मानेसर स्थित कंपनी से रैपिड टेस्टिंग किट मंगाए जाने का रास्ता साफ हुआ।
कीमत में था भारी अंतर :
मानेसर स्थित कंपनी की तरफ से मिलने वाली किट व चीन से आने वाली किट की कीमत में भी भारी अंतर है। चीन से आने वाली 1 लाख किट के लिए राज्य सरकार को 780 रुपये प्रति किट के हिसाब से कीमत चुकानी पड़ती, जबकि दक्षिण कोरियाई कंपनी सरकार को महज 380 रुपये प्रति किट के हिसाब से 1 लाख किट उपलब्ध कराएगी। ऐसे में प्रति किट के हिसाब से सरकार को 400 रुपये कम खर्च करने पड़ेंगे।