अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. चंद्र शेखर का कहना है कि 29 साल का मरीज दिल्ली से हैदराबाद जाने के लिए एयरपोर्ट जा रहा था। अपने एक रिश्तेदार के यहां आया था। परिवार को लगा कि तनाव के कारण वह भूल रहा है, लेकिन जब जांच की गई तो ब्रेन में ट्यूमर पाया गया।
एम्स के बाद दिल्ली सरकार के लोक नायक अस्पताल में भी मरीज को बिना बेहोश किए मस्तिष्क की सर्जरी की गई। सर्जरी के दौरान डॉक्टर मरीज से बात करते रहें। उसके अंग हिलाने पर डॉक्टर स्क्रीन पर देखते रहे। मरीज के मस्तिष्क के बाईं ओर 5.4 गुणा 4.5 सेमी का ट्यूमर था। यह दिल्ली सरकार के अस्पताल के लिए बड़ी उपलब्धि है।
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अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. चंद्र शेखर का कहना है कि 29 साल का मरीज दिल्ली से हैदराबाद जाने के लिए एयरपोर्ट जा रहा था। अपने एक रिश्तेदार के यहां आया था। परिवार को लगा कि तनाव के कारण वह भूल रहा है, लेकिन जब जांच की गई तो ब्रेन में ट्यूमर पाया गया। यह बाईं ओर 5.4 गुणा 4.5 सेमी के साइज का था। डॉक्टरों ने मरीज से बात की और अवेक सर्जरी के लिए सहमति दी। एनेस्थीसिया की टीम के सहयोग से रणनीति बनाई गई।
इस मामले में जब सर्जरी शुरू की और ब्रेन के किसी महत्वपूर्ण हिस्से को टच करते हैं, उसका असर उसके अंग पर हो रहा है, यह जानने के लिए हम सर्जरी के दौरान ही मरीज से बात करते रहते हैं। सामान्य तौर पर मरीज को बेहोश किया जाता है। ऐसी सर्जरी में होश आने के बाद पता चलता है कि मस्तिष्क से जुड़ा वह अंग काम कर रहा है या नहीं। मरीज के सहयोग से 5 घंटे में अवेक सर्जरी हो सकी। मरीज में तेजी से रिकवरी हो रही है।