डॉक्टरों का कहना है कि धीरे-धीरे उसकी त्वचा काफी हद तक रिकवर होगी। साथ ही उन्होंने दुनिया भर में बच्चों का ऐसा पहला केस देखने का दावा किया है। पिता मुकेश कुमार ने बताया कि झुलसने के बाद 40 दिन तक मेरठ के निजी अस्पताल में वंश भर्ती रहा। फिर उसे घर ले आए।
लोगों के बताने पर वह बिजनौर स्थित एक वैद्य के पास पहुंचे। वहां 18 महीने तक बच्चे का उपचार कराते रहे। वहीं, मदद को लेकर पीएम मोदी से सीएम अखिलेश तक गुहार लगाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस बीच मेरठ के ही डॉ. नीरज ने बच्चे को ठीक करने का बीड़ा उठाया।
करीब 40 फीसदी तक झुलसे वंश के बेहतर इलाज के लिए यूएसए के चिल्ड्रेन बर्न फाउंडेशन और मैक्स की टीम ने सोशल मीडिया के जरिये भी फंड एकत्रित किया। जबकि मैक्स ने आधे से ज्यादा इलाज को मुफ्त किया और अनोखे केस को अंजाम तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
पंचशील पार्क स्थित मैक्स अस्पताल के चीफ ऑफ प्लास्टिक सर्जरी डॉ. सुनील चौधरी बताते हैं कि जब वंश उनके पास आया उस वक्त उसकी गर्दन छाती से चिपकी थी। दोनों हाथ पेट से चिपके थे। उसका होठ नीचे लटका हुआ था। टीम के आगे सबसे पहले चुनौती एनेस्थिसिया देना थी।
तीन योजनाएं बनाई गईं। दो योजनाएं फेल होने के बाद तीसरी के तहत एक इंजेक्शन के जरिये एनेस्थिसिया देकर वंश की गर्दन और छाती को अलग किया। जांघ से त्वचा लेकर प्लास्टिक सर्जरी की गई। चौधरी का कहना है कि इस ऑपरेशन में स्पाई एंजियोग्राफी और 3डी प्रिंटिंग तकनीक का सहयोग ज्यादा था।