प्रोफेसर घोष ने कहा, दिल्ली में अगर रिक्टर पैमाने पर छह की तीव्रता का भी भूकंप आया तो राजधानी में इसका विनाशकारी असर होगा। कई इमारतें जमींदोज हो जाएंगी और धूल में मिल जाएंगी। जापान में आए भूकंप से तुलना करते हुए उन्होंने कहा, जापान में धार्मिक तौर पर निर्माण मानकों का पालन होता है। जापान पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में आता है, जो दुनिया का भूकंप प्रभावित सबसे संवेदनशील क्षेत्र है। प्रोफेसर घोष ने कहा, जापान में आठ तक की तीव्रता वाले झटकों को सहन करने वाले इमारतें बनाई जाती हैं।
यमुना के मैदानों को खतरा ज्यादा
राष्ट्रीय भूविज्ञान केंद्र के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में इस साल 12 अप्रैल से 29 मई तक 10 भूकंप आ चुके हैं। बुधवार को भी भूकंप के झटके आए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक, जहां फॉल्ट लाइन होती है, वहीं पर भूकंप का अधिकेंद्र बनता है। दरअसल, फॉल्ट एक तरह के भूगर्भीय दरार होते हैं, जहां से होकर भूकंपीय तरंगें गुजरती हैं। ऐसे फॅाल्ट सिस्टम की वजह से छह से 6.5 तीव्रता का भूकंप आने की आशंका रहती है। एक अध्ययन के मुताबिक, यमुना के मैदानों को भूकंप से ज्यादा खतरा है।
स्थानीय फॅाल्ट सिस्टम हुआ सक्रिय
भारतीय मौसम विभाग में भूकंप जोखिम मूल्यांकन केंद्र के पूर्व प्रमुख डॉ. एके शुक्ला ने इमारतों के मानक जल्द से जल्द बदलने की वकालत करते हुए कहा, इनमें से ज्यादातर भूकंप 2.3 से 4.5 की तीव्रता के थे। अगर ऐसे ही ये झटके आते रहे तो आने वाले दिनों में दिल्ली में बड़ा भूकंप दस्तक दे सकता है। इसकी वजह यह है कि दिल्ली के आसपास स्थानीय फॉल्ट सिस्टम का सक्रिय होना है।