मिलावट की मंडी बनें गाजियाबाद में सबसे ज्यादा जहर हल्दी में पाया गया है। साबुत और पाउडर दोनों में जहरीले रसायन मिले हैं। मेरठ मंडल में लिए गए हल्दी के 90 फीसदी सैंपल फेल पाए गए हैं।
इनमें मिलने वाला रसायन अत्यंत तीव्र श्रेणी का है। कई राज्यों में हो रही हल्दी की सप्लाई को देखते हुए अफसरों ने शिकंजा कस दिया है।
फूड सेफ्टी विभाग द्वारा मेरठ मंडल में हल्दी के 477 सैंपल लिए गए। इनमें से 90 फीसदी सैंपल फेल हुए हैं। फूड सेफ्टी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 85 फीसदी सैंपल अनसेफ की श्रेणी में आए हैं।
तेजी से हो रहा जहरीली हल्दी का कारोबार
अफसरों ने हल्दी के टैंपो भी पकड़े हैं, जिनमें इसको अन्य राज्यों-जनपदों को भेजा जा रहा था। फूड सेफ्टी अफसर यदुवीर यादव ने बताया कि मेरठ मंडल के जनपदों में ज्यादातर हल्दी की सप्लाई गाजियाबाद से की गई।
चिकित्सक डा. जीवी सिंह के अनुसार हल्दी का प्रयोग बहुत थोड़ी मात्रा में किया जाता है, इसके बावजूद यह पूरे भोजन को जहरीला करने में सक्षम है। इससे आंत, गुर्दे, गले व ब्लड कैंसरे, लीवर सोरोसिस हो सकता है।
फूड सेफ्टी अफसर भगवत सिंह ने बताया कि गाजियाबाद से हल्दी की सप्लाई यूपी के सभी जनपदों, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार तक की जाती है।
देश ही नहीं विदेश भी जाती है यहां की हल्दी
यहां के कारोबारी नेपाल को भी हल्दी का निर्यात करते हैं। परेशानी का कारण यह है कि ज्यादातर कारोबार बिना बिल के होता है। ऐसे में सैंपल फेल हो जाने के बावजूद इसकेमाल को वापस भी नहीं मंगवाया जा सकता।
यों तो सभी मसालों में मिलावट होने की पुष्टि हुई है, लेकिन हल्दी का हाल ज्यादा खराब है। इसके सैंपल लेने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। फूड कमिश्नर ने भी इसकेलिए विशेष आदेश जारी किए हैं। - विनीत कुमार, डीओ गाजियाबाद-नोएडा