जिला अस्पताल में तीन माह पहले पढ़ने-लिखने में कम रुचि रखने वाले, मंद बुद्धि बच्चों की काउंसलिंग की जानी थी। एडोलसंस (किशोरावस्था) काउंसलिंग का प्रस्ताव भी तैयार किया गया।
लेकिन अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों में तालमेल की कमी से योजना शुरू होने से पहले ही ठंडे बस्ते में चली गई। नवंबर में एडोलसंस काउंसलिंग शुरू की जानी थी। जिसमें मनोचिकित्सक पद्यति से मंद बुद्धि, अस्थिर व्यवहार करने वाले बच्चों की काउंसलिंग की योजना थी।
जिसके लिए एनजीओ से भी अनुबंध होना था, लेकिन अभी तक इस योजना पर अमल नहीं हुआ। हालांकि, अस्पताल की सीएमएस मीना मिश्रा ने बताया कि ऐसे जो भी मरीज आ रहे हैं, उनकी काउंसलिंग की जा रही है।
दूसरी तरफ, डाक्टर इस बात से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी इस योजना का प्रपोजल तैयार किया गया है। उनके पास ऐसा कोई मरीज नहीं आया है और न ही काउंसलिंग की गई है।
यही हाल फिजियोथैरेपी विभाग का भी है। अस्पताल में मौजूद रोशनी विभाग को पीजीआई शिफ्ट कर वहां फिजियोथैरेपी विभाग खोलने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए 20 उपकरणों की एक सूची प्राधिकरण को भेजी गई, लेकिन यह योजना भी क्रियान्वित नहीं हो सकी।