मिसलगढ़ी के आकाश नगर में पांच मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग के गिरने के लिए प्रशासन के जीडीए के 15 अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी ठहराया है। इनमें से चार को तत्काल निलंबित कर दिया गया। जबकि बिल्डर किशनपाल तोमर, मुकेश सिंह व दिनेश कुमार अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।
जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी ने बताया कि सुपरवाइजर गोविंद शरण दुबे, गजेंद्र सिंह, राजबीर सिंह और वर्कमेट मुकेश को निलंबित किया गया है। तीन को कारण बताओ नोटिस और सात के खिलाफ शासन से कार्रवाई संस्तुति की गई है। एक सेवानिवृत्त अधिकारी के खिलाफ कानूनी राय लेकर कार्रवाई की जाएगी।
उधर, सोमवार शाम तक करीब 27 घंटे चले बचाव और राहत अभियान में मलबे से 11 लोगों को निकाला गया, जिनमें दो की मौत हो गई। सोमवार सुबह करीब सवा तीन बजे सागर (6) मलबे से निकाला गया, जिसे अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।
मौके पर पहुंचीं मेरठ की मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने अवैध इमारतों को गिराने का नोटिस देने के बाद भी निर्माण जारी रहने पर जीडीए के चीफ इंजीनियर वीएन सिंह को फटकार लगाई। उन्होंने डीएम माहेश्वरी को निर्देश दिया कि जीडीए के उन चार जेई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए, जिनके कार्यकाल में अवैध निर्माण चलता रहा।
ये पाए गए दोषी
प्रवर्तन प्रभारी निशांत कुमार, अवर अभियंता टीएन सिंह, रमाकांत तिवारी, रामेश्वर शर्मा, कमलदीप, अरुण कुमार सिंह, आदर्श भटनागर, सुपरवाइजर जतन स्वरूप शर्मा, अरुण कुमार सिंह और सेवानिवृत्त हो चुके अधिशाषी अभियंता वीके जैन।