हाईकोर्ट ने पुणे के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट के बुधवार के आदेश के मद्देनजर माओवादी समर्थक गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई अगले आदेश तक स्थगित कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने नवलखा समेत पांच माओवादी समर्थकों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए छह सितंबर तक घर में नजरबंद रखने का निर्देश दिया था।
जस्टिस एस. मुरलीधर व जस्टिस विनोद गोयल की खंडपीठ ने कहा चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए फिलहाल इस याचिका पर सुनवाई करना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में संबंधित मामले की सुनवाई छह सितंबर को होनी है। इसलिए इस याचिका पर अब सुनवाई 14 सितंबर को की जाएगी।
हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को महाराष्ट्र की पुणे पुलिस के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाया था। कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र पुलिस की एफआईआर, केस डायरी व अन्य सभी दस्तावेज मराठी भाषा में है। पुलिस ने आदेश के बाद भी एफआईआर के अलावा किसी भी दस्तावेज की अंग्रेजी या हिंदी भाषा में अनुवादित सत्यापित कॉपी कोर्ट में पेश नहीं की है।
खंडपीठ ने साकेत कोर्ट के सीएमएम द्वारा ट्रांजिट रिमांड की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जब जज के समक्ष कोई दस्तावेज अंग्रेजी अथवा हिंदी में पेश नहीं किया गया तो इस बात से कैसे सहमत हो गए कि पुलिस अधिकारी ने जो गिरफ्तारी की है वह सही और सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पालन किया गया।
याचिका में कहा गया था कि याची को उसकी गिरफ्तारी का आधार तक नहीं बताया गया और जो दस्तावेज दिए गए वह सभी मराठी भाषा में थे। यह भाषा याची अथवा उसके परिजनों को नहीं आती।