वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया पर शनिवार को शाहीन बाग में हुए हमले की मीडिया संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों ने कड़ी निंदा करते हुए इसके गुनहगारों के खिलाफ कड़ी पुलिस कार्रवाई की मांग की है। न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (एनबीएफ) ने अपने बयान में कहा है कि शाहीन बाग में काम करने के दौरान पत्रकारों पर निर्देशित हिंसा की घटनाओं से वह बेहद चिंतित है।
एनबीएफ के अध्यक्ष अर्नब गोस्वामी ने कहा कि यह हमला शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी होने का दावा करने वालों में बढ़ती असहिष्णुता की भावना की वजह से हुआ है। यह घटना पत्रकारों के प्रति बढ़ती शत्रुता को दर्शाती है। प्रदर्शन कर रहे कुछ लोग नहीं चाहते कि उनके दायरे से बाहर जाकर कोई उनकी बातों को रखे। अर्नब गोस्वामी ने कहा कि हाल के दिनों में कई अन्य टीवी पत्रकारों पर हमले हुए हैं। इनमें कैमरे व अन्य उपकरण टूटे और नष्ट हुए हैं। शुक्रवार को हमले का शिकार पत्रकार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एनबीएफ आरोपियों के खिलाफ तत्काल पुलिस कार्रवाई की मांग करता है। उन्होंने पत्रकारों व संपादकों पर हमले के खिलाफ भारतीय मीडिया की एकजुटता पर जोर दिया।
भारतीय महिला प्रेस ने एक बयान में कहा कि पत्रकारों पर हमले की हम निंदा करते हैं और उनके साथ एकजुटता से खड़े हैं। आईडब्ल्यूपीसी ने शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे लोगों के एक समूह के पत्रकारों पर हमला करने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि चौरसिया, दूरदर्शन के रिपोर्टर नितेंद्र सिंह और उनकी टीम के कैमरा कर्मियों को बंधक बनाया गया। एक अंग्रेजी दैनिक के फोटोग्राफर को कुछ प्रदर्शनकारियों ने उस समय धमकी दी, जब वे आंदोलन की फोटो ले रहे थे। पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और बल का प्रयोग मीडिया की स्वतंत्रता को कमजोर करता है।
उधर, दीपक चौरसिया ने एक मिनट का वीडियो अपलोड किया है, जिसमें वह प्रदर्शनकारियों से घिरे हुए थे। बाद में प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ हाथापाई की। उन्होंने हटाने की कोशिश की तो उनका माइक्रोफोन भी छीन लिया। वीडियो में कुछ लोगों को कैमरामैन से कैमरा छीनने की कोशिश करते हुए देखा गया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 51 वर्षीय चौरसिया ने अपने साथ मारपीट और भीड़ द्वारा कैमरा छीनने की शिकायत की है। पुलिस ने समूह के द्वारा लूट के दौरान चोट पहुंचाने का मामला दर्ज कर लिया है।