जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में विवि प्रबंधन के खिलाफ एक दिन की हड़ताल करने पर 48 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का नोटिस भेजा जा रहा है। सेंट्रल सिविल सर्विस (सीसीएस) नियमों के तहत शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
यह मामला जून में हुई एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में सामने आया था। जेएनयू शिक्षक संघ एग्जीक्यूटिव काउंसिल सदस्यों को पत्र लिखकर इस फैसले के खिलाफ दोबारा विचार करने को कहेगा।
जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. अतूल सूद के मुताबिक, 48 शिक्षकों के खिलाफ चार्जशीट की कार्रवाई बेहद हैरान करने वाली है। जेएनयू शिक्षक संघ इस कार्रवाई का विरोध करता है।
जेएनयू में आरक्षण नियमों की अनदेखी के खिलाफ जुलाई 2018 में एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया था। इसमें अधिकतर शिक्षकों के अलावा छात्र संघ ने भी भाग लिया था।
शिक्षक होने के नाते विश्वविद्यालय में यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो फिर छात्र या शिक्षक कोई भी आवाज उठा सकता है। इसी के तहत आरक्षण नियमों के उल्लंघन पर यह एक दिन की हड़ताल की थी। इसमें भाग लेने के कारण 48 शिक्षकों के खिलाफ चार्जशीट जारी की गई है।
प्रो. सूद के मुताबिक, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा था कि सरकार बोलने की आजादी पर रोक नहीं लगा रही है। यदि ऐसा था तो अब चार्जशीट लगाने का कोई औचित्य नहीं है।
गौरतलब है कि 2018 में जेएनयू, यूजीसी व एमएचआरडी के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत केंद्रीय विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में सेंट्रल सिविल सर्विस (सीसीएस) नियमावली लागू हुई थी।
समझौते के तहत शिक्षक केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज नहीं कर सकते थे। ऐसा करने पर नियमों के तहत कार्रवाई होगी। सीसीएस के खिलाफ देशभर में शिक्षकों ने विरोध जताया था। हालांकि, लगभग सभी विश्वविद्यालयों ने सीसीएस के तहत समझौता कर लिया है।