देश के सभी स्कूल और उच्च शिक्षण संस्थानों में 2019 में तेजाब पीड़िताओं को दाखिले में पांच फीसदी आरक्षण देना ही होगा। शिक्षण संस्थानों को दाखिला आवेदन पत्र में दिव्यांगजन श्रेणी में तेजाब पीड़िताओं को आरक्षण कॉलम में इसे विशेष रूप से उल्लेखित भी करना होगा।
यदि कोई संस्थान तेजाब पीड़िताओं को दाखिला आवेदन पत्र में जानकारी व दाखिला देने से इंकार करता है तो उसके खिलाफ दिव्यांगजन कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2018 को जनवरी 2018 में ही लागू कर दिया था। इसमें दिव्यांगजनों की नई श्रेणियां शामिल की गई थीं। नई श्रेणी में तेजाब पीड़िता भी शामिल थी।
हालांकि, सालभर से अधिक समय बीतने के बाद भी शिक्षण संस्थान अपने दाखिला आवेदन पत्र में तेजाब पीड़िताओं के लिए आरक्षण की जानकारी का उल्लेख नहीं कर रहे हैं। जबकि दिव्यांगजन आरक्षण श्रेणी में नई दिव्यांगजन श्रेणियों के साथ तेजाब पीड़िताओं को आरक्षण देने की जानकारी का उल्लेख करना अनिवार्य किया गया था।
दाखिले में कुल सीटों में पांच फीसदी दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित हैं। तेजाब पीड़िताओं को प्रति प्रोग्राम एक सीट आरक्षित की गई है। हालांकि, जागरूकता के अभाव व संस्थानों द्वारा जानकारी न देने के चलते तेजाब पीड़िताएं दाखिले से वंचित रह रही हैं।
दाखिला हेल्प डेस्क पर देनी होगी जानकारी
सरकार के पिछले निर्देशों के तहत शिक्षण संस्थानों को अपनी दाखिला हेल्प डेस्क पर तेजाब पीड़िताओं के लिए अलग से उल्लेख करना अनिवार्य है। ताकि आम छात्र ऐसी पीड़िताओं तक जागरूकता पहुंचा सकें। शिक्षण संस्थानों को अपने दाखिला आवेदन विज्ञापन या प्रॉस्पेक्ट्स में अलग से भी तेजाब पीड़िताओं को आरक्षण की जानकारी देनी होगी। गौरतलब है कि उन्हें दाखिला प्रक्रिया की न्यूनतम योग्यता में पांच फीसदी तक छूट भी मिलेगी। इसके अलावा यदि पीड़िताओं की संख्या ज्यादा होती है तो फिर सीटों की संख्या एक फीसदी तक बढ़ाने का भी प्रावधान है।
आगे बढ़ने में मिलेगी मदद
शिक्षा में तेजाब पीड़िताओं को दाखिले में आरक्षण मिलने से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। तेजाब के चलते पीड़िताओं का जीवन अंधेरे में डूब जाता है। वे निराश होकर जीवन की चाह छोड़ देती हैं। हालांकि ऐसी पीड़िताओं को शिक्षा से जोड़कर ही आगे बढ़ाया जा सकता है। इस नियम को अच्छे से लागू करने से पीड़िताएं आम लड़कियों की तरह आगे बढ़ पाएंगी।
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लक्ष्मी, तेजाब पीड़िता, दिल्ली