घरेलू सहायक बनकर चोरी करने वाले गिरोह का है सदस्य, 90 लाख के गहने बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। स्पेशल स्टाफ ने चितरंजन पार्क में 1.30 करोड़ रुपये की नकदी और 90 लाख रुपये के आभूषण चुराने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान जिला बालासोर, ओडिशा निवासी संजय कुमार मलिक उर्फ विक्की उर्फ शक्ति (19) के रूप में हुई है। आरोपी के कब्जे से 90 लाख रुपये के हीरे और सोने के आभूषण बरामद हुए है। आरोपी घरेलू सहायक बनकर चोरी करने वाले गिरोह का सदस्य है। यह लोग शुरू में घरेलू सहायक के रूप में काम करने के बहाने से घर की रेकी करते थे।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी और उसके साथियों ने अभी तक कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अंकित चौहान ने बताया कि सीआर पार्क में एक घर में चोरी के संबंध में एक पीसीआर कॉल 14 अक्तूबर, 2024 को प्राप्त हुई थी। एम-ब्लॉक, जीके-दो में रहने वाली 69 वर्षीय एक महिला ने शिकायत दी थी कि उसके घर से अलमारी तोड़कर 5-6 सोने के सेट, 18-20 सोने की चूड़ियां, 10-12 हीरे और सॉलिटेयर चूड़ियां, 13 सोने के सिक्के और 1.30 करोड़ रुपये की नकदी चोरी हो गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि उनका नौकर शक्ति भी गायब है। जांच करने पर शक्ति का मेाबाइल बंद मिला। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से पता लगा कि घरेलू नौकर ने 3 आरोपियों के साथ मिलकर चोरी की हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने संजय को गिरफ्तार कर लिया है।
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झाड़ियों के नीचे छुपा दिए थे आभूषण
सोने के आभूषण महरौली के संजय वन में झाड़ियों के नीचे एक काले लाल रंग की चुन्नी में रखे हुए थे। पुलिस ने मौके पर जाकर भूषण बरामद कर लिए। इनमें 18 हार (पत्थर लगे पीले रंग के), 1 चेन (पत्थर लगे पीले रंग के), 1 सफेद मोती का हार, 24 जोड़ी झुमके, कान के लटकन और टॉप्स, 6 पीस झुमके, कान के लटकन और टॉप्स, 23 पीले रंग की चूड़ियां, 5 पीस चांदी के रंग का तार, 9 कलाई घड़ियां, 3 नाक के आभूषण, 8 पीस में 01 टूटा हुआ चटर और 16 विविध आभूषण (पीले रंग और सफेद पत्थर) बरामद किए। सभी आभूषण सोने, चांदी के थे और कई में किमती हीरे और पत्थर लगे थे।
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ऐसे वारदात को अंजाम देते थे आरोपी
आरोपी समूह में दिल्ली आते थे और दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर किराये का मकान लेते थे और समय-समय पर मकान बदलते रहते थे। आरोपी घरों में घरेलू सहायक के रूप में काम की तलाश करते थे। काम मिलने के बाद वह घर की सारी रेकी कर लेते थे। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों को घर की स्थिति, रहने वालों लोगों की जानकारी और गहनों के बारे सारी जानकारी दे देते थे। घर में सहायक के रूप में काम करने वाला सदस्य सही समय पाकर अन्य सदस्यों को बुला लेता था। इसके बाद लूट कर माल आपस में बांट लेते थे।