6 साल पहले वर्ष 2014 में एक जालसाज ने 11 अफगानियों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनवा दिए थे। इसके आधार पर ये सभी मास्को जा पहुंचे। इनका इरादा वहां से तुर्की और फिर ब्रिटेन जाने का था। तुर्की के इमिग्रेशन विभाग ने इन्हें पकड़कर भारत भेज दिया था। इन्हें आईजीआई एयरपोर्ट से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। 20 फरवरी को इस फर्जीवाड़े में शामिल चरण सिंह सचदेवा उर्फ करण (48) को दिल्ली से दबोचा गया है।
दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (आईजीआई एयरपोर्ट) संजय भाटिया ने बताया कि चरण सिंह दिल्ली के जनकपुरी इलाके में रह रहा था। पूछताछ में पता चला कि वह मूल रूप से अफगानिस्तान का नागरिक है। उसने एक एजेंट के जरिए 2013 में पांच लाख रुपये में जाली भारतीय पासपोर्ट बनवाया था। मॉस्को भेजे गए सभी अफगानियों से भी उसने प्रति पासपोर्ट 5 लाख रुपये लिए थे। पूछताछ में उसने बताया कि पहले उसने अपना फर्जी इलेक्टर्स फोटो पहचान पत्र (एपिक) और अन्य दस्तावेज तैयार किए थे। इन्हें एजेंट के जरिये आरपीओ ऑफिस भेजकर पासपोर्ट बनवाया।
उपायुक्त ने बताया कि इस मामले में शामिल 11 अफगानी नागरिकों ने भी भारतीय पहचान हासिल करने के बाद पासपोर्ट बनवाया और 14 जून 2014 को आईजीआई एयरपोर्ट से मॉस्को चले गए। 10 जुलाई 2014 को ब्रिटिश हाईकमीशन ने इनके पकड़े जाने की सूचना दिल्ली पुलिस को दी। इन्हें 19-20 जुलाई 2014 को भारत भेजा गया।
आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरते ही इन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ये 11 लोग दो परिवारों के थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि मॉस्को में एक एजेंट से साठगांठ करके इन्होंने यूके का फर्जी वीजा बनवाया। इसमें दिखाया गया कि यह नई दिल्ली से जारी किया गया है। ये सभी मॉस्को से तुर्की के रास्ते यूके जाने की फिराक में थे, तभी तुर्की में उन्हें इमिग्रेशन विभाग ने जांच में पकड़ लिया। इसके बाद ब्रिटिश हाईकमीशन ने इनका वीजा जांचा तो वह फर्जी निकला।