-मामले में फोरेंसिक जांच और खून से सने चाकू की बरामदगी भी अहम साबित हुई
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 23 वर्षीय युवक पर चाकू से हमला करने के मामले में मोहम्मद अरमान उर्फ मनु को हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि पीड़ित का बाद में अपने बयान से मुकर जाना आरोपी के खिलाफ पहले दिए बयान और अन्य सबूतों को खत्म नहीं करता। मामले में फोरेंसिक जांच और खून से सने चाकू की बरामदगी भी अहम साबित हुई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमेध कुमार सेठी ने आदेश में कहा कि गवाहों के बाद में अपने बयान से मुकरने के बावजूद आरोपी के खिलाफ मौजूद सबूतों पर विचार किया जा सकता है। मामला 12 अक्तूबर 2024 की रात उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सुंदर नगरी इलाके का है। सागर नाम के युवक पर उसके घर के पास बटन वाले चाकू से हमला किया गया था। हमले में उसके पेट और हाथ में गंभीर चोटें आई थीं। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस को दिए शुरुआती बयान में सागर ने आरोप लगाया था कि उसके मामा सुरेश के साथ पुराने विवाद के चलते अरमान ने उसे धमकी दी और फिर चाकू से हमला कर दिया।
अदालत में बदल गया पीड़ित का बयान : सुनवाई के दौरान सागर ने पहले अरमान को पहचान लिया, लेकिन बाद में कहा कि उसे हमलावर का चेहरा याद नहीं है। उसने इस बात से भी इनकार कर दिया कि अरमान ने उस पर हमला किया था। मामले के अन्य गवाह भी पुलिस को दिए अपने बयानों से मुकर गए। हालांकि, अदालत ने कहा कि केवल बयान बदलने के आधार पर शुरुआती गवाही को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में भी किसी परिचित व्यक्ति द्वारा हमला किए जाने का जिक्र था, जो पीड़ित के शुरुआती बयान का समर्थन करता था।
डीएनए जांच और चाकू की बरामदगी बनी अहम कड़ी : अदालत ने मामले में फोरेंसिक जांच को भी अहम माना। जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर खून से सना चाकू बरामद किया गया था। चाकू पर मिले खून से तैयार डीएनए प्रोफाइल पीड़ित के डीएनए से मेल खाती थी। इसके अलावा, सबूतों की बरामदगी की वीडियोग्राफी भी की गई थी। अदालत ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट से यह