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सुनपेड़ कांडः '70 साल का बुजुर्ग दीवार फांद सकता है क्या?'

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साहब, तुम्हीं बताओ क्या 70 साल का बुजुर्ग ऊंची दीवार फांद सकता है? जो ठीक से चल भी नहीं पाता। हमारे तीन बेटे मार दिए गए। अभी तक हमें न्याय भी नहीं मिला है।
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अब फिर से हमारे ही परिवार के लोगों को जेल में डाला जा रहा है। आखिर हम किसके सहारे जीएं। एक साल की पोती अपने बाप का चेहरा भी नहीं देख पाई है। क्या ये बच्चे मासूम नहीं हैं? तब मीडिया कहां थी?

हम अपने बच्चों को लेकर कहां जाएं? ये दास्तां हैं उस परिवार के 75 साल की बुजुर्ग महिला राजवती की, जिनके बेटे और दो भतीजों की एक साल पहले मोबाइल झगड़े में हत्या की जा चुकी है।
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'फांसी पर चढ़ने को तैयार हैं साहब'

सुनपेड़ गांव में मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने आई राजवती ने ‘अमर उजाला’ के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक साल पहले दलित परिवार के लोगों ने उनके बेटे इंद्राज उर्फ पप्पी, भतीजे मोहनलाल उर्फ पप्पू व भरतपाल उर्फ बालू की उस वक्त चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी थी, जब तीनों बेटे खेत में सिंचाई कर घर लौट रहे थे।

बेटों की याद में रोते-रोते आंखें सूख गई हैं। हम अपना दर्द किससे कहें। बुजुर्ग महिला का कहना था कि पुलिस उनके 70 वर्षीय देवर बलवंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या 70 साल का बुजुर्ग 6 फुट की दीवार फांद सकता है क्या?

आरोपी परिवार की तीनों विधवाएं कविता, नीरज व बबिता का कहना है कि सरकार इस घटना की सीबीआई से जांच करा ले, सारा मामला सामने आ जाएगा। उनका कहना है कि यदि इस घटना में हमारे किसी भी परिवार के सदस्यों का हाथ पाया जाए तो हम फांसी पर चढ़ने को तैयार हैं।

किसी अदालत में अपील तक नहीं करेंगे। 30 से 35 साल की तीनों विधवाओं का कहना था कि जब उनके पतियों की हत्या की गई तो कांग्रेस की सरकार थी। उस समय न तो हुडा आए और न ही राहुल गांधी। अब बच्चों को कैसे पालें?
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