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Delhi NCR News: उम्र का पुख्ता प्रमाण न होने पर पॉक्सो व दुष्कर्म मामले में आरोपी बरी

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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- स्कूल रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं, पिता ने खुद उम्र कम दर्ज कराने की बात मानी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम और आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष पीड़िता के नाबालिग होने का विश्वसनीय और स्वतंत्र प्रमाण पेश करने में विफल रहा। ऐसे में ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि का फैसला टिक नहीं सकता।
न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की एकल पीठ ने अनारुल हक बनाम राज्य मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा रद्द कर दी। आरोपी पर 13 वर्ष से कम उम्र की लड़की के अपहरण और उसके साथ बार-बार यौन शोषण का आरोप था। अभियोजन पक्ष ने पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए स्कूल रिकॉर्ड पेश किया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 4 मार्च 2002 दर्ज थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता ने स्वीकार किया कि उन्होंने स्कूल में दाखिले के लिए जानबूझकर बेटी की उम्र कम दर्ज कराई थी। पीड़िता ने भी अदालत में कहा कि स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि सही नहीं है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि जन्म प्रमाण-पत्र, मैट्रिकुलेशन प्रमाण-पत्र या मेडिकल आयु परीक्षण जैसे स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किए गए। केवल स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर यह संदेह से परे साबित नहीं किया जा सकता कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी।
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पीड़िता ने अदालत में बदले बयान, कहा-मर्जी से हुआ था निकाह
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने यह भी कहा कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी। दोनों परिवारों की सहमति से उनका निकाह हुआ और अब उनका एक बच्चा भी है। उसने अदालत से कहा कि वह आरोपी के साथ ही रहना चाहती है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि एक अन्य एफआईआर में भी पीड़िता गवाह के रूप में पेश होकर आरोपों से मुकर गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया। इसके बाद आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया।
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