फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: 16 साल पुराने गैर-पंजीकृत आयुर्वेदिक प्रैक्टिस मामले में आरोपी बरी

विज्ञापन
विज्ञापन
कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा-निरीक्षण रिपोर्ट अकेले प्रैक्टिस साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं, गंभीर संदेह कानूनी सबूत की जगह नहीं ले सकता
विज्ञापन


नितिन राजपूत
पूर्वी दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने बिना पंजीकरण आयुर्वेदिक चिकित्सा करने के आरोप में चल रहे 16 साल पुराने मामले में बिभूति कुमार रे को बरी कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अभय चौधरी ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी निरीक्षण के समय बिना वैध पंजीकरण के आयुर्वेदिक चिकित्सा की प्रैक्टिस कर रहा था। अदालत ने कहा, आपराधिक मामले में आरोप साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होती है और अपराध उचित संदेह से परे साबित होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि केवल निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी चिकित्सा की प्रैक्टिस कर रहा था। इसके लिए विश्वसनीय और स्वतंत्र साक्ष्य जरूरी थे। अभियोजन यह भी साबित नहीं कर सका कि निरीक्षण के दिन आरोपी का नाम दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद के रजिस्टर में दर्ज नहीं था। अदालत ने स्पष्ट किया कि महज आरोप लगा देने से किसी व्यक्ति के गैर-पंजीकृत होने की बात साबित नहीं होती।
विज्ञापन

न मरीज मिला, न दवा और न पर्ची
परिषद की ओर से गवाही में कहा गया कि निरीक्षण के दौरान आरोपी आयुर्वेदिक चिकित्सा करते मिला था और उसने एक फॉर्म में खुद को आयुर्वेदिक चिकित्सा करने वाला बताया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं हैं। न कोई प्रिस्क्रिप्शन पर्ची मिली, न दवा या अन्य चिकित्सकीय सामग्री जब्त हुई। यह भी साबित नहीं हुआ कि आरोपी किसी मरीज को दवा लिख रहा था।
निरीक्षण के समय किसी मरीज को गवाह नहीं बनाया गया। आसपास लोग मौजूद होने के बावजूद कोई स्वतंत्र गवाह भी जांच में शामिल नहीं किया गया। कथित क्लिनिक की फोटो या वीडियो भी रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई। अदालत ने कहा कि गंभीर संदेह भी कानूनी सबूत की जगह नहीं ले सकता। इन कमियों के कारण आरोपी को दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम की धारा 30 के आरोप से बरी कर दिया गया।

डीबीसीपी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
यह मामला दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद (डीबीसीपी) की शिकायत पर दर्ज हुआ था। परिषद के अधिकारियों ने 8 जुलाई 2010 को नंद नगरी की नाथू कॉलोनी स्थित आरोपी के परिसर का निरीक्षण किया था। आरोप था कि वह परिषद में पंजीकरण के बिना आयुर्वेदिक चिकित्सा कर रहा था।
विज्ञापन

अदालत ने 31 अगस्त 2010 को मामले का संज्ञान लेकर आरोपी को समन किया। लंबी सुनवाई के बाद 27 मई 2024 को धारा 30 के तहत आरोप तय किए गए। बिभूति कुमार ने आरोपों से इन्कार कर मुकदमे का सामना किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें