विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) के मुताबिक राजधानी दिल्ली में जानलेवा प्रदूषण के कारण हर तीसरे बच्चे के फेफड़े जन्म से ही खराब हो रहे हैं। संस्थान के मुताबिक 2016 में लगभग 3.5 करोड़ भारतीय अस्थमा की बीमारी से पीड़ित थे।
विज्ञापन
2 of 6
सीएसई ने इसके लिए वायु प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग को जिम्मेदार ठहराया है। मालूम हो कि पूरे उत्तर भारत खासकर दिल्ली में प्रदूषण के चलते वायु गुणवत्ता का बुरा हाल है।
विज्ञापन
3 of 6
तापमान में गिरावट के साथ ही पूरा शहर जहरीली धुंध यानि स्मॉग से घिर गया। हालात इतने बदतर हो गए कि राजधानी के स्कूलों तक को बंद करने की नौबत आ गई।
4 of 6
smog in delhi
- फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट की मानें तो भारत में 61% असामयिक मृत्यु की वजह अनियमित रहन-सहन या गैर-संचारी रोग(एनसीडी) हैं। रिपोर्ट की लीड राइटर विभा वार्शने ने बताया कि इस असामयिक मृत्यु की संख्या पर लगाम लगाने के लिए प्रदूषण को नियंत्रित करने की सख्त आवश्यकता है।
विज्ञापन
5 of 6
smog in delhi
- फोटो : अमर उजाला
उनका कहना है कि अगर अभी से पर्यावरणीय जोखिम कारकों को हटाना शुरु करें तब जाकर 2030 तक आज के मुकाबले एक तिहाई मुत्यु को कम किया जा सकता है।
सीएसई की डायरेक्टर जनरल सुनीता नारायन ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के हिसाब से गैर-संचारी रोग के प्रमुख कारक शराब व तंबाकू आदि हैं लेकिन, ज्यादा नमक और चीनी व फैट वाले खाने भी इसके लिए उतने ही जिम्मेदार हैं।