जिन
सड़कों पर पैदल यात्रियों का दवाब अधिक है, उन पर वाहन चालकों को सतर्क
रहना चाहिए। यह टिप्पणी अदालत ने आरोपी डीटीसी बस चालक को राहत न देते हुए
की है। चालक पर बीआरटी कॉरीडोर में लापरवाही व गफलत से वाहन चलाने का आरोप
था।
साकेत अदालत की जिला न्यायाधीश ईना मल्होत्रा ने बस चालक सुनील
कुमार राणा की अपील खारिज करते हुए कहा कि बीआरटी कॉरीडोर में बस चालक बेहद
रफ्तार से वाहन चलाते हैं, बगैर उन पैदल यात्रियों का ध्यान रखे जो किसी
भी जगह से सड़क पार करते हैं।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने लापरवाही व गफलत
से बस चलाते हुए राहगीर की जान लेने के मामले में सुनील को दोषी करार देते
हुए तीन माह कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
सत्र
अदालत ने निचली अदालत के फैसले को कायम रखते हुए कहा कि याची के प्रति
सुनाया गया। निचली अदालत को फैसला बिल्कुल सही है और इसमें दखल देने की कोई
गुंजाइश नहीं है।
अभियोजन के मुताबिक बीआरटी कॉरीडोर पर बस चलाते
हुए 25 मार्च 2010 को राणा से एक्सीडेंट हो गया था। इस हादसे में एक राहगीर
को टक्कर लगने से उसकी मौत हो गई थी।
निचली अदालत के फैसले के
खिलाफ अपील में राणा ने कहा कि वह बेकसूर है और दूसरे वाहन से टक्कर लगने
के बाद मृतक अचानक उसकी बस के सामने आ गिरा था। इतने समय में ही उसने बस को
रोक दिया था।
अदालत ने याची की दलीलों से असहमति जताते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान बस की बॉडी में क्षति व आगे वाला शीशा टूटा पाया गया है।