नई दिल्ली। चुनाव से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जेएनयू इकाई ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में एबीवीपी जेएनयू में सह मंत्री तान्या कुमारी और कार्यकर्ता कनिष्क कौर की ओर से एक पर्चा जारी किया गया है। इसमें विश्वविद्यालय में छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े करते हुए कई आरोप लगाए गए है।
पर्चे के अनुसार जेएनयू में देश के कोने-कोने से छात्र आते है। हम सोचते हैं कि यह ज्ञान का वह मंदिर है, जहां प्रतिभा को सम्मान मिलेगा और एक बेहतर भविष्य का निर्माण करेंगे लेकिन यहां जर्जर हॉस्टल की टपकती छतें, गंदे वॉशरूम और मेस का घटिया खाना की आवाज उठाने पर जुर्माना लगा दिया जाता है। सीपीओ मैनुअल के अनुसार प्रशासनिक भवन के सौ मीटर के दायरे में अपनी समस्याओं को लेकर गुहार लगाना प्रतिबंधित है। अगर अपने हॉस्टल की बदहाली के खिलाफ धरने पर बैठते हैं तो 20 हजार रुपये का जुर्माना लग सकता है।
अभी तक कुल 16 कार्यकर्ताओं पर जुर्माना और दस कार्यकर्ताओं का पंजीकरण रोक दिया गया। साथ ही पांच कार्यकर्ता अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाएं। इसके अलावा फरवरी 2022 से अब तक तीन लाख 14 हजार रुपये का जुर्माना लग चुका है। पर्चे को लेकर एबीवीपी से जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने कहा कि पर्चे में उठाए गए सभी तथ्य वाजिब है। उधर, डेमोक्रटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन से जेएनयू छात्र संघ में उपाध्यक्ष मनीषा ने कहा कि प्रदर्शन से जुर्माने को लेकर जो पर्चे में दावे किए गए है उससे ज्यादा जुर्माना लेफ्ट कार्यकर्ताओं पर प्रशासन ने लगा रखा है। एबीवीपी ने डीन ऑफ स्टूडेंट्स के समक्ष प्रदर्शन ही नहीं किया है। छात्र हित की आवाज लेफ्ट छात्र संगठनों ने उठाई है। इसका खामियाजा उन्हें सबसे ज्यादा भुगतना पड़ता है। यह पर्चा चुनाव को लेकर जारी किया है। इससे चुनाव को लेकर पृष्ठभूमि तैयार की जा सकें। इसका छात्र हित से कुछ लेना-देना नहीं है।