आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल का विवादों संग चोली-दामन का साथ है। फिलहाल केजरीवाल को 'गरीबों का मसीहा' के तौर पर दिखाए जाने वाले टीवी एड को लेकर विवाद पैदा हो गया है।
पिछले कई दिनों से टीवी पर आने वाले दो मिनट लंबे इस विज्ञापन को लेकर विपक्षी पार्टियों सहित केजरीवाल के पुराने साथियों ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
भारतीय जनता पार्टी ने तो आप को धमकी देते हुए कहा है कि अगर पार्टी ने तुरंत ही इस विज्ञापन को वापस नहीं लिया तो पार्टी उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
पार्टी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा है कि आप सरकार का यह ऐड झूठ से भरा है। एक तरफ तो पार्टी कहती है उसके पास सफाई कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं है जबकि, असंवैधानिक तरीके से प्रचार पर पैसे खर्च किए जा रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने इस विज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन किया है। भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि इस ऐड में भले ही केजरीवाल की तस्वीर नहीं दिखाई गई है लेकिन, उनका नाम बार-बार लिया गया है।
इतना ही नहीं आप ने इस ऐड में विपक्षी पार्टियों प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया को खलनायक के तौर पर दिखाया है जबकि, केजरीवाल को गरीबों के मसीहा के तौर पर पेश किया गया है।
क्यों आपत्तिजनक है यह ऐड
असल में टीवी चैनलों पर चल रहे इस ऐड पर आपत्ति की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश है जिसमें कहा गया है कि सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री, राज्यपाल या किसी भी नेता की तस्वीर नहीं लगाई जा सकती।
कोर्ट ने साफ किया है कि सरकारी विज्ञापनों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश की ही तस्वीर लगाई जा सकती है। हालांकि इसमें भी कोर्ट ने यह प्रावधान जोड़ रखा है कि इन तीनों की तस्वीर भी उसी शर्त पर दिखाई जा सकती है जबकि ये लोग खुद इसकी जिम्मेदारी लें।
जबकि आम आदमी पार्टी के इस टीवी ऐड में भले ही केजरीवाल की तस्वीर नहीं दिखाई गई है लेकिन दो मिनट के इस विज्ञापन में कुल नौ बार केजरीवाल का नाम लिया गया है। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।
'महिला को नौकरानी दिखाया'
इस ऐड को लेकर दूसरी आपत्ति यह है कि इसमें एक तरफ केजरीवाल को 'गरीबों का मसीहा' कहा गया है जबकि, दूसरी तरफ केजरीवाल का विरोध करने वालों को खलनायक और आम जनता के हितों के खिलाफ दिखाया गया है।
इतना ही नहीं, इस ऐड में मीडिया की भूमिका को लेकर भी आपत्ति उठाई गई है। ऐड में मीडिया को खलनायक के तौर पर पेश किया गया है जो लगातार केजरीवाल के खिलाफ खबरें चला रहा है।
विज्ञापन पर तीसरी आपत्ति दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बरखा सिंह की है जो इसे महिला विरोधी बता रही हैं। उनका कहना है इस विज्ञापन में एक ओर पुरुष को आराम से बैठे हुए दिखाया गया है जबकि, महिला घर से लेकर बाहर तक का सारा काम कर रही है।
बरखा सिंह का आरोप है कि इस ऐड में महिला को नौकरानी के तौर पर दिखाया गया है। साथ ही यह सरकारी पैसे का खुला दुरुपयोग है।
केजरीवाले के पुराने साथी का हमला
केवल विपक्षी पार्टियों ने ही नहीं, अरविंद केजरीवाल के पुराने साथी और आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक प्रशांत भूषण ने भी इस ऐड पर घोर आपत्ति व्यक्त की है।
प्रशांत ने ट्वीट कर कहा, 'इस ऐड में न सिर्फ सरकारी पैसे की फिजूल खर्ची की गई है बल्कि, यह लैंगिक असामता को बढ़ावा देने वाला है। इसमें महिला को उसके पति की नौकरानी के तौर पर पेश किया गया है।'
प्रशांत ने आरोप लगाया है कि 'जय हो केजरीवाल' नाम का यह टीवी ऐड केजरीवाल की झूठी तस्वीर पेश करता है। यह ऐड सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लंघन है। एक नेता की वाहवाही करने के लिए सरकारी पैसे को बर्बाद किया गया है।
हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से सफाई देते पूर्व पत्रकार आशुतोष ने कहा कि इस ऐड में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कहीं से भी उल्लंघन नहीं किया गया है। इसमें कहीं भी केजरीवाल की तस्वीर नहीं दिखाई गई है।
Apart from being a crass and crude abuse of funds the Kejriwal ad on TV is sexist and projects women as servants of their husbands. Shocking— Prashant Bhushan (@pbhushan1) June 18, 2015