आप रणनीतिकार भी मान रहे हैं कि इस बार का चुनाव आसान नहीं होने वाला है। पार्टी के अंदरूनी सर्वे में यह बात सामने भी आ रही है। तभी आप की तैयारी एकदम शुरुआत से है। उम्मीदवारों के चयन में लोगों के फीडबैक को खास तवज्जो दी जा रही है। जिन सीटों पर अभी उम्मीदवार तय किए गए हैं, उनमें से कई सीटों पर आप के मौजूदा विधायकों की जगह पार्षद लोगों की पसंद हैं। इसमें कई जगहों पर दूसरे दलों के नेता को भी बेहतर बताया गया है। इसके आधार पर विधायकों का टिकट काटा गया है।
31 सीटों में से 11 अभी आप के पास नहीं, आठ पर भाजपा और तीन पर बागी
जिन 31 सीटों पर आप ने उम्मीदवार उतारे हैं, उनमें से 11 सीटें अभी आप के पास नहीं है। आठ सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। जबकि तीन सीटों से आप के टिकट से जीते विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। यहां से आप ने नए उम्मीदवार उतारे हैं। बची 20 सीटों में से राखी बिड़लान और मनीष सिसोदिया की सीट बदली गई है। 18 विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों के टिकट बदलकर नए उम्मीदवार उतारे गए हैं। पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय का कहना है कि इनमें से 90 प्रतिशत हमारे पार्षद हैं, जो वहां उसी विधानसभा में काम कर रहे थे। लोगों के फीडबैक के आधार पर जिन पार्षदों का फीडबैक अच्छा रहा है, पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है।
पार्टी को उम्मीद, पूर्ण बहुमत की बनेगी सरकार
पार्टी ने अब तक 31 प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। अरविंद केजरीवाल का एक ही मूल मंत्र है कि हमें जनता के लिए काम करना है। इसलिए जनता से फीडबैक लेने के बाद पार्टी ने उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं। हमें भरोसा है कि आप का चुनावी अभियान अब और आगे बढ़ेगा। हम जनता के साथ मिलकर एक बार फिर दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में सरकार बनाएंगे। -गोपाल राय, दिल्ली प्रदेश संयोजक, आप