पेशी के लिए जाते सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया
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आम आदमी पार्टी के 27 विधायकों को बड़ी राहत मिली है। रोगी कल्याण समितियों में अध्यक्ष के पद पर होते हुए लाभ के पद वाले मामले को खारिज कर दिया गया है। इसे आम आदमी पार्टी ने अपनी जीत बताया है। हालांकि, यह भी कहा है कि फैसला आने में देरी हुई। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मीडिया सलाहकार नागेंद्र शर्मा ने ट्वीट किया। उन्होंने आश्चर्य जताया कि फर्जी शिकायत खारिज करने के चुनाव आयोग की सिफारिश पर आदेश जारी करने में राष्ट्रपति कार्यालय को चार महीने का वक्त लग गया। जबकि 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने में 24 घंटे भी नहीं लगे थे। पार्टी का कहना है कि रोगी कल्याण समिति में लाभ का पद मामला फर्जी निकला। विधायकों के काम में बाधा पहुंचाने के लिए इस तरह की शिकायत की गई थी। कई अस्पतालों से जुड़ी रोगी कल्याण समितियों के प्रमुखों के रूप में नियुक्ति के बाद विधायकों पर लाभ के पद पर होने का आरोप लगा था।
परेशान करने के लिए दो साल तक मामले को उलझाया
वरिष्ठ नेता और उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा प्रभारी दिलीप पांडेय ने कहा कि रोगी कल्याण समिति में जिन विधायकों की जिम्मेदारी लगाई गई थी, उनका दूर-दूर तक ऑफिस ऑफ प्रॉफिट से कोई लेना-देना ही नहीं है। रोगी कल्याण समिति एक एनजीओ की तरह काम करता है। ये अस्पताल के प्रबंधन से जुड़ा है। इसके बावजूद विधायकों को परेशान करने की नियत से दो साल तक चुनाव आयोग में मामले को उलझाकर रखा गया। आप के खिलाफ किस तरह साजिश हो रही है ये हमें समझना पड़ेगा।
सवाल भी दागेे
1. रोगी कल्याण समिति के मामले में आम आदमी पार्टी के 27 विधायकों के खिलाफ झूठी शिकायत किसकी साजिश थी ?
2. क्या आप को बदनाम करने और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की छवि नुकसान पहुंचाने के लिए दो साल तक मामले को उलझाया गया ?
3. आप के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भ्रामक शिकायत उन्हें परेशान करने की नीयत से थी ?
4. क्या आप को बदनाम करने की नियत से बार-बार झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, ताकि पार्टी इन्हीं सब गतिविधियों में फंसी रहे।