आम आदमी पार्टी (आप) नेता योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण के इस्तीफे पर संग्राम शुरू हो गया है। जहां बृहस्पतिवार शाम राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) ने दोनों नेताओं के इस्तीफे पर मुहर लगा दी वहीं योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने प्रेस वार्ता कर कहा कि उन्होंने अभी इस्तीफा दिया ही नहीं है। योगेंद्र ने कहा ‘मेरे कुछ पांच-छह मुद्दे हैं, अगर पार्टी उन्हें स्वीकार कर ले तो हम अपना इस्तीफा तुरंत पेश कर देंगे।’
इधर बैठक की जानकारी देते हुए पार्टी नेता कुमार विश्वास ने बताया कि बीती 17 मार्च को प्रशांत और योगेंद्र ने पांच शर्तों के साथ अपने इस्तीफे की पेशकश की थी। अहम शर्तें पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार, कार्यकर्ताओं से बातचीत करने को कमेटी का गठन व अन्य तीन शर्तें कुछ मामलों की जांच से जुड़ी थीं। पार्टी ने इन्हें मान लिया। फिर भी दोनों ने इस्तीफा नहीं दिया।
दोनों केजरीवाल को संयोजक पद से हटाने की जिद पर अड़े थे। बृहस्पतिवार को पीएसी ने निर्णय लिया कि केजरीवाल के पद पर बने रहने या हटने का फैसला 28 मार्च की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगा। योगेंद्र और प्रशांत पर पीएसी के फैसले को परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। उसकी मंजूरी मिलने के बाद दोनों नेता
राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हिस्सा नहीं रहेंगे। हालांकि पार्टी में बने रहेंगे।
वहीं, आप नेता मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया कि प्रशांत व योगेंद्र से चल रही बातचीत बेनतीजा रही है। दोनों नेता केजरीवाल को हटाने के लिए लगातार दबाव बना रहे थे।
मैंने अभी इस्तीफा नहीं दिया है
आम आदमी पार्टी (आप) की पीएसी का फैसला आते ही योगेंद्र यादव ने कहा कि हमने अभी पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। नोएडा के सेक्टर-14 में आप नेता प्रशांत भूषण के घर पर बृहस्पतिवार की रात को आयोजित प्रेसवार्ता में योगेंद्र ने कहा, ‘मेरे कुछ पांच-छह मुद्दे हैं, अगर पार्टी उन्हें स्वीकार कर ले तो हमें पार्टी में रहने में कोई दिलचस्पी नहीं है। हम अपना इस्तीफा पेश कर देंगे।’ वहीं भूषण ने कहा कि पार्टी के निर्णय लेने की शक्ति एक ही जगह केंद्रित हो गई है।
पंचायत स्तर के चुनावों का निर्णय भी दिल्ली से लिया जा रहा है। अरविंद केजरीवाल कुछ झूठे लोगों से घिर गए हैं। इस दौरान आप नेता आनंद कुमार ने भी आप में दोहरी राजनीति होने की बात कही। आप नेताओं ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से मीडिया को प्रतिबंधित करने के फैसले पर भी सवाल उठाए।
योगेंद्र ने बताया कि हम जिन मुद्दों को उठा रहे हैं उन पर केजरीवाल को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। अगर पार्टी इसे स्वीकार कर ले, तो वह कल ही इस्तीफा देने को तैयार हैं। दिल्ली की जनता ने कुछ उम्मीदें रखकर सत्ता की बागडोर दी है। उसका सम्मान किया जाना चाहिए। पिछले दस दिनों से गतिरोध चल रहा है। इस दौरान मुद्दों को हल करने के बजाय हमारे इस्तीफे की ही बात कही गई। प्रेस वार्ता से पहले योगेंद्र ने इन्हीं सभी बातों का जिक्र करते हुए अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी भी लिखी थी।
योगेंद्र-प्रशांत गुट के राष्ट्रीय परिषद सदस्य आज करेंगे बैठक
‘बीते दस दिनों में हम सभी ने पार्टी को बचाने व एकजुट करने के लिए कई कोशिशें कीं। फिर भी योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। वह दोनों पार्टी के सामने ऐसी मांगें रख रहे थे, जिन्हें पूरा नहीं किया जा सकता था। यादव ने पहले जो मांगें पार्टी के सामने रखी थीं पार्टी ने उन सभी को मान लिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं की की ओर अलग-अलग प्रस्ताव रखे गए जो उचित नहीं थे। योगेंद्र ने आज (बृहस्पतिवार) शाम को 6:30 बजे फोन करके कहा कि उन्हें लगता है कि 28 की बैठक में उनकी कोई बात नहीं मानी जाएगी। इसलिए वह सारी बातों को यहीं खत्म करते हैं।’
संजय सिंह, आप नेता
आम आदमी पार्टी (आप) की पीएसी केफैसले के बाद पार्टी का टूटना तय माना जा रहा है। योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण के समर्थकों ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परिषद केसदस्यों की बैठक बुलाई है। इसके बारे में प्रशांत समर्थक मिलन गुप्ता का दावा है कि 120 से ज्यादा लोग बैठक में हिस्सा में लेंगे। इसमें पार्टी के मौजूदा हालात पर चर्चा होगी। दूसरी तरफ 28 फरवरी को आप की पूरी राष्ट्रीय परिषद बैठक करेगी। अभी यह साफ नहीं हो सका है कि शुक्रवार की बैठक में शामिल होने वाले सदस्य शनिवार की बैठक में हिस्सा लेंगे या उसका बायकाट करेंगे।