आम आदमी पार्टी ने उन दिल्लीवासियों पर दरियादिली दिखाई थी जिन्होंने अक्टूबर 2012 से लेकर अप्रैल 2013 तक बिजली के बिल नहीं भरे थे लेकिन शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उस पर 'करंट' दाग दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने आप के इस कदम पर रोक लगा दी है।
अपना इस्तीफा देने से दो दिन पहले यानी 12 फरवरी को अरविंद केजरीवाल की सरकार ने यह फैसला लिया था। इस फैसले के तहत उनलोगों के बिजली बिल 50 फीसदी माफ कर दिए जाएंगे, जिन्होंने अक्टूबर 2012 से लेकर अप्रैल 2013 तक बिजली के बिल नहीं भरे हैं।
इस दरियादिली से दिल्ली सरकार को 6 करोड़ रुपये का नुकसान होता।
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हाईकोर्ट में दाखिल एक पीआईएल में कहा गया था कि यह उनलोगों के साथ सरासर गलत होगा जिन्होंने अपना बिजली बिल इस दौरान टाइम से भरा था।
इससे पहले 19 फरवरी को एक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से इस निर्णय को लेकर एक हलफनामा दाखिल करने को कहा था।
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इस निर्णय की घोषणा करते हुए आप नेता मनीष सिसोदिया ने कहा था कि गलत बिजली बिल को लेकर जिनलोगों ने पार्टी के कैंपन को समर्थन दिया था उन्हें अपना बिल जमा करने पर 50 फीसदी की छूट मिलेगी। साथ ही इसपर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।
अक्टूबर 2012 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के निवासियों से यह अपील की थी कि वह गलत बिजली और पानी बिल के कारण अपना बिल ना भरें। पार्टी के इस कैंपन पर 10 लाख लोगों ने हस्ताक्षर किए थे और 24 हजार लोगों ने अपना बिल नहीं भरा था।
दिल्ली में केजरीवाल ने सरकार बनाने के कुछ दिन के अंदर ही बिजली के दाम आधे कर दिए थे। साथ ही केजरीवाल ने दिल्ली में बिजली बांटने वाली दो कंपनियों पर आरोप लगाया था कि वह मनमानी कीमत वसूल रही हैं।