इंसानी सभ्यता के इतिहास के सबसे सुलझी हुई शख्सियत हैं राम। बचपन में राम की कथा पढ़ी तो दिमाग में इनकी एक छवि बनी। बड़े हुए तो साहित्य से भी राम को जाना। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूं। कुंभ मेले में भी राम को जाना। राम की महिमा देखना भी संभव हुआ। समझ में आया कि राम से बड़ा राम का नाम है।
तभी अभिवादन नमस्कार, प्रणाम नहीं, हमारी तरफ जय सियाराम से होता है। राम खुद में ही अभिवादन बन जाते हैं।मेरे लिए रामायण में बताई गई लक्ष्मण रेखा भी खास मायने रखती है। मन का लक्ष्य पर टिक जाना, मर्यादा में रहकर उसे हासिल करने का प्रयत्न करना ही लक्ष्मण रेखा है।
यह इंसान की शख्सियत को मजबूत करता है। और लक्ष्य तक पहुंचने की मंजिल भी इससे आसान होती है।राम हमारी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हैं। उनके बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना भी संभव नहीं। वह मेरे, आपके, हम सबके जीवन का अहम हैं। गांधी का रघुपति राघव राजा राम हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। और हां, राम से लव-कुश भी जुड़ते हैं, जिनका ध्यान आते ही मन में वात्सल्य का भाव आ जाता है।
राम आदर्श पुत्र हैं, भाई, पिता, पति व मित्र भी। अपने माता-पिता के आज्ञाकारी हैं। उनके संबंधों का हर तंतु मर्यादा की कसौटी पर कसा हुआ है। राम मर्यादा पुरुष हैं। उन्होंने मर्यादा बनाई और निभाई भी है। उन्होंने हर युग के लिए संभावना के द्वार खोले हैं। तभी वह सबसे बड़े देव हैं। राम इसी रूप में मुझ प्रिय हैं।
(डॉ. बारां फारूकी, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय)