आम आदमी पार्टी (आप) ने उच्च व उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति के बाद लाभ के पद में नियुक्ति का विरोध किया है। पार्टी का मानना है कि इस तरह की नियुक्तियां विवाद का विषय बनती जा रही हैं। ऐसे में इस तरह की नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग पार्टी ने की है। इस बारे में आप सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
पार्टी कार्यालय में शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों को लाभ का पद देना विवाद का विषय बनता जा रहा है। खासतौर से तब, जब किसी न्यायाधीश ने किसी केस में सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया हो। इससे लोगों के मन में शंका पैदा होती है कि फैसला कहीं पक्षपात पूर्ण तो नहीं था।
संजय सिंह ने एक जज के नाम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि न्यायाधीश पी. सदाशिव ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को जमानत दी थी। सेवानिवृत्त होने पर उन्हें केरल का राज्यपाल बना दिया जाता है, जबकि एससी एसटी एक्ट के संबंध में फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश आदर्श गोयल को बाद में एनजीटी का चेयरमैन बना दिया।
संजय सिंह यही नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा को हटाने के पक्ष में सरकार का समर्थन करने वाले न्यायाधीश एके सीकरी को सरकार लंदन में 5 साल के लिए संवैधानिक लाभ का पद देने जा रही थी, लेकिन मीडिया में इस नियुक्ति पर सवाल उठते ही जस्टिस सीकरी ने पद लेने से इंकार कर दिया।
संजय सिंह ने कहा कि अब 5 साल पूरे होने पर केंद्र सरकार आनन-फानन में लोकपाल का गठन करने जा रही है। पता चला है कि लोकपाल के पद पर न्यायाधीश एके सीकरी को नियुक्त किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो लोकपाल का पद पहले दिन से ही सवालों के घेरे में आ जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि इस तरह की नियुक्तियां बंद होनी चाहिए।