विधानसभा अध्यक्ष ने शिकायत मिलने पर आप के विधानसभा में नेता अरविंद केजरीवाल से इसके बारे में सहमति मांगी। केजरीवाल ने शिकायत पर कोई एतराज नहीं जताया। इसके बाद जांच में सभी आरोप सही पाए गए।
विधानसभा अध्यक्ष ने माना कि दलबदल कानून के दायरे में सिर्फ अपनी मूल को पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने वाले विधायक ही नहीं आते, बल्कि उनका आचरण भी अहम होता है।
कपिल मिश्रा का आचरण सार्वजनिक तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का रहा है। इस मामले में उन्हें कई बार सुनवाई का मौका दिया गया। लेकिन बीते दो तारीखों पर वह पेश नहीं हुए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी।
दिल्ली विधानसभा की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि करावल नगर से विधायक कपिल मिश्रा को संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल कानून) के पैराग्राफ 2(1)(ए) के तहत अयोग्य घोषित किया जाता है। कपिल मिश्रा का निष्कासन 27 जनवरी 2019 से प्रभावी रहेगा। अब करावल नगर सीट रिक्त मानी जाएगी।
विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ कपिल मिश्रा सोमवार को हाई कोर्ट में अपील करेंगे। कपिल मिश्रा का कहना है कि इस मामले में प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। शहर से बाहर होने की वजह से वह 26 जनवरी की तारीख पर नहीं पहुंच सके। एक अगस्त को दिल्ली वापस लौटने की जानकारी भी विधानसभा अध्यक्ष को दी गई थी।
इसके अलावा कपिल मिश्रा की दलील है कि विधानसभा अध्यक्ष अपनी शक्तियों का लांघते हुए मामले की सुनवाई कर रहे थे। कायदे से पहले उनको पार्टी से नोटिस मिलना चाहिए था। उसके बाद आगे कोई कार्रवाई की जाती। लेकिन उनके मामले में पार्टी ने कोई नोटिस जारी नहीं है।
फिर, सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से जिन गवाहों को बुलाने की अर्जी दी गई थी, विधानसभा अध्यक्ष ने उनको नोटिस तक नहीं किया। कपिल मिश्रा का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री के समर्थन में अभियान चलाने से उनकी सदस्यता जा सकती है तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू जैसी विपक्षी नेताओं के समर्थन में आयोजित रैलियों में शामिल होने वाले अरविंद केजरीवाल की सदस्यता क्यों नहीं जानी चाहिए।
कपिल मिश्रा ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को गलत ठहराते हुए बताया कि वह इसके खिलाफ सोमवार को हाईकोर्ट में अपील करेंगे। कपिल मिश्रा के अलावा तीन अन्य विधायकों के खिलाफ भी सौरभ भारद्वाज ने याचिका लगाई थी।
इसमें गांधी नगर से विधायक अनिल बाजपेयी व बिजवासन विधायक देंवेद्र सेहरावत के भाजपा में शामिल होने के एवज से सदस्यता रद्द करने की मांग की गई थी। वहीं, सुलतानपुर माजरा संदीप कुमार पर पार्टी विरोधी गतिविधियों गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। तीनों मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है।