न्यायमूर्ति रेखा पल्ली और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया। खान ने मामले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), दिल्ली द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के साथ-साथ समन और जांच को चुनौती दी थी।
उन्होंने तर्क दिया था कि ऐसी आशंका है कि पीएमएलए के प्रावधानों की जानबूझकर गलत व्याख्या के आधार पर ईडी के पास निहित शक्ति और अधिकार को दुरुपयोग के साधन के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
याचिका में कहा गया है प्रावधानों का इस्तेमाल इस देश के लोकतांत्रिक और संघीय ढांचे के मूल ढांचे को प्रताड़ित करने और ध्वस्त करने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि याचिकाकर्ता को निरर्थक और आधारहीन कार्यवाही में फंसाया जा रहा है।
मामले में आरोप लगाया गया है कि अमानतुल्ला खान ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में काम करते हुए मानदंडों और सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से विभिन्न लोगों की भर्ती की।
ईडी ने आरोप लगाया है कि खान ने दिल्ली वक्फ बोर्ड में कर्मचारियों की अवैध भर्ती से नकद में अपराध की बड़ी रकम अर्जित की और उसे अपने सहयोगियों के नाम पर अचल संपत्ति खरीदने के लिए निवेश किया।
ईडी ने अमानतुल्ला खान के तीन कथित सहयोगियों जीशान हैदर, दाउद नासिर और जावेद इमाम सिद्दीकी सहित पांच संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया, जिन्हें केंद्रीय एजेंसी ने पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया था।